
नई दिल्ली। नीति आयोग (NITI Aayog) के अध्यक्ष अमिताभ कांत (Amitabh Kant) ने कहा है कि भारत, चीन की नकल कर दुनिया में अगला मैन्यूफैक्चरिंग हब नहीं बन सकता। अगर भारत को ग्लोबल लीडर बनना है तो उसे अपने उभरते क्षेत्रों में विकास करना होगा।
ग्रीन एन्वायरनमेंट पर करना होगा फोकस
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान अमिताभ कांत ने कहा कि ‘भारत के निजी क्षेत्रों को खुद ही अपने लिए एक महत्वकांक्षी टारगेट निश्चित करना होगा और ग्रीन हाइड्रोजन, हाई-एंड बैट्रीज और एडवांस सोलर प्लांट पर फोकस करना होगा ताकि वो इस प्रतियोगिता में शामिल हो सके। चीन (China) का नकल कर भारत दुनिया का अगला मैन्यूफैक्चरिंग हब नहीं बन सकता। हमें हमेशा उभरते क्षेत्रों के विकास की तरफ देखना होगा। यह वो समय है जब आप अपने इन क्षेत्रों के विकास पर ध्यान दें।‘
चीन से होड़ को छोड़ना होगा
अमिताभ कांत के मुताबिक चीन जिन क्षेत्रों में पहले से लीडर की भूमिका में है उन क्षेत्रों में भारत आगे नहीं बढ़ सकता। अमिताभ कांत ने कहा कि भारत के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मजबूत अग्रणी कंपनियां मौजूद हैं। ये (हाइड्रोजन, हाई एंड बैट्रीज और एडवांस सोलर प्लांट) वो क्षेत्र हैं जहां तकनीकि विकास हैं। उन्होंने कहा कि भारत ग्रीन हाइड्रोजन (green hydrogen) और ग्रीन अमोनिया (green Ammonia) दोनों का ही निर्यातक बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले पांच सालों में सोलर एनर्जी के दाम गिरकर 1 रूपया प्रति यूनिट हो जाना चाहिए। और इसलिए इससे ऐसे हालात बनेंगे कि भारत के ग्रीन उत्पाद भारत के हाई कार्बन उत्पादों से ज्यादा सस्ते हो जाएंगे।
ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के एक्सपोर्ट का रखें लक्ष्य
अमिताभ कांत ने कहा कि यूरोप और अमेरिका एक साथ मिलकर लगभग 550 गीगावाट्स ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया इम्पोर्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य होना चाहिए कि वो कम से कम 200 गीगावाट ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया साल 2030 तक एक्सपोर्ट करे। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योगों को डिजीटल होने के साथ-साथ स्किल में इन्वेस्ट और प्रतियोगी होने की जरुरत है।
अमिताभ कांत ने कहा कि कोविड महामारी की वजह से जो मुश्किलें आई हैं वो रुकावट का कारण नहीं बनेंगी। निजी क्षेत्रों को प्रतियोगी होने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि दुनिया ग्रीन टेक्नोलॉजी की तरफ जा रही है और पुरानी टेक्नोलॉजी खत्म हो जाएगी। ग्रीन तकनीक ही भविष्य है। भारत ग्रीन एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट्स के दाम को कम करने के लिए बेहतरीन प्रयास कर रहा है। आयोग इस वक्त कई राज्यों के साथ इलेक्ट्रीक व्हीकल और ग्रीन मोबिलिटी पर काम कर रहा है और इस दिशा में राज्यों के प्रयास सराहनीय हैं।
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