
गुवाहाटी। पूर्वाेत्तर राज्यों में भूखमरी से बचने के लिए लोग किडनी बेचने केा मजबूर हो रहे हैं। असम में किडनी रैकेट का भंड़ाफोड़ हुआ है। कुछ लोगों की जागरूकता से किडनी रैकेट का पर्दाफाश हो सका है। लोगों ने कथित एजेंट समेत पांच लोगों को पुलिस को सुपुर्द किया है। इस रैकेट ने असम मोरीगांव जिले में अकेले 30 गरीबों की किडनियां खरीदी हैं।
आधा दर्जन लोगों ने कबूला था कि भूखमरी से बचने के लिए किडनी बेची
असम के मोरीगांव जिले के दक्षिण धर्मातुल गांव के करीब आधा दर्जन लोगों ने मीडिया के सामने कबूल किया है कि उन लोगों ने अपनी किडनियां बेची है। किडनी बेचने वालों में अधिकतर किसान या दिहाड़ी मजदूर हैं। कोरोना महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन में काफी आर्थिक परेशानियों से गुजरे हैं। किडनी बेचने वाले अपना लोन चुकान, भूखमरी से बचने के लिए यह किया है। पीडि़तों के अनुसार एजेंट उन लोगों को कोलकाता लेकर गया। वहां सर्जरी हुई और किडनी निकाली गई। गांव के लोगों ने किडनी रैकेट में शामिल एक एजेंटी और अन्य लोगों को पुलिस के हवााले भी किया है।
किडनी रैकेट के दो लोग हुए हैं अरेस्ट
मोरीगांव की एसपी अपर्णा नटराजन ने बताया कि किडनी रैकेट में शामिल एक महिला समेत 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अरेस्ट किया गया कथित एजेंट लिलीमई बोडो गुवाहाटी का रहने वाला है। गांववालों के अनुसार लिलीमई किडनी के बदले पांच लाख रुपये दिलाता है लेकिन खुद कमिशन भी लेता है। श्रीकांत दास नाम के एक युवक ने बताया है कि उन्होंने अपने बेटे के इलाज के लिए एक किडनी बेची है। एक किडनी की कीमत 5 लाख रुपये उसे मिली। लेकिन उसके हाथ केवल साढ़े तीन रुपये आए। बाकी कमिशन लिलीमई ने काट लिया था।
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