
Parliament Mansoon session: दिल्ली में नौकरीशाही पर नियंत्रण संबंधी अध्यादेश की जगह नए विधेयक को जल्द संसद में पेश किया जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली के नौकरशाहों पर नियंत्रण संबंधी अध्यादेश की जगह लेने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के पास होने के बाद दिल्ली राज्य की निर्वाचित सरकार का ब्यूरोक्रेट्स पर ट्रांसफर-पोस्टिंग या कार्रवाई का अधिकार खत्म हो जाएगा। ट्रांसफर-पोस्टिंग या कार्रवाई के लिए प्राधिकरण बनाया गया है जिसकी संस्तुतियों पर फैसला लेने का अधिकार उप राज्यपाल को होगा। यानी इस बिल के पास होने के बाद उप राज्यपाल एक बार फिर दिल्ली राज्य के सर्वेसर्वा हो जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने एलजी के दखल को खत्म कर दिया था
दिल्ली सरकार और उप राज्यपाल, राज्य की नौकरशाही पर नियंत्रण को लेकर लगातार आमने-सामने होते रहे हैं। इसको लेकर आप सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने दिल्ली राज्य के अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर का अधिकार राज्य की निर्वाचित सरकार के जिम्मे होने की बात कही थी। 11 मई के पहले तक यह अधिकार, उप राज्यपाल के पास था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एलजी और राज्य सरकार के झगड़े को खत्म करने हुए अपना फैसला सुनाया और राज्य की निर्वाचित सरकार के अधिकार क्षेत्र में इस मामले को दे दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने एक सर्वसम्मत फैसले में केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच आठ साल पुराने विवाद को समाप्त करते हुए यह बताया कि नौकरशाही का पूरा नियंत्रण राज्य सरकार के पास होगा। यह केंद्र सरकार के 2015 की अधिसूचना के आधार पर लिया गया फैसला था। कोर्ट ने कहा था कि एक निर्वाचित सरकार को नौकरशाहों पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है, अन्यथा सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
इसके बाद केंद्र ने लाया अध्यादेश जिसे संसद में किया जाना है पेश
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद केंद्र सरकार ने उप राज्यपाल के नियंत्रण में पुन: ब्यूरोक्रेसी करने के लिए एक अध्यादेश लाया है। इसके अंतर्गत दिल्ली के अलावा कई केंद्र शासित प्रदेशों में एक प्राधिकरण का गठन किया जाना है। इसके अंतर्गत प्राधिकरण के अंतर्गत नौकरीशाही का ट्रांसफर और उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार मिला। प्राधिकरण दिल्ली, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव और दादरा और नगर हवेली के लिए बनाया गया। मुख्यमंत्री को प्राधिकरण में रखा गया है जबकि दो अन्य सदस्यों में सीनियर आईएएस अधिकारियों को रखा गया है। इस प्राधिरकण के फैसले बहुमत के आधार पर लिए जाएंगे। अगर मुख्यमंत्री प्राधिकरण में किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई या किसी ट्रांसफर की संस्तुति करता है तो प्राधिकरण के दो अन्य सदस्य असहमत हैं तो मामला सीधे एलजी के पास चला जाएगा। यानी कि परोक्ष रुप से एलजी के पास पूरा नियंत्रण।
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