पालकी शर्मा ने ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसायटी के सामने रखा भारत का कठोर दृष्टिकोण, मिथकों का खंडन किया, जानें और क्या कहा

Published : Apr 26, 2024, 06:33 AM ISTUpdated : Apr 26, 2024, 07:29 AM IST
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सार

पालकी शर्मा प्रसिद्ध भारतीय पत्रकार हैं। ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसायटी के इनविटेशन पर उन्होंने भारत के संबंध में बात की। इस दौरान पालकी ने भारत के निष्पक्ष और कठोर दृष्टिकोण का भी सामने रखा। जानें और क्या कहा पालकी शर्मा ने…

नेशनल डेस्क। पालकी शर्मा भारत की जाने मानी पत्रकारों में से एक हैं। हाल ही में उन्हें ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसायटी की ओर से इंटरव्यू के लिए इनविटेशन आया था। इस साक्षात्कार में पालकी ने भारत के कुछ अनछुए पहलुओं को छुआ। इसके साथ ही भारत के निष्पक्ष और कठोर दृष्टिकोण को लेकर चर्चा की। भारत के काले सच की ओर भी इशारा किया। 

भारत का ज्वलंत चित्र प्रस्तुत किया
पालकी शर्मा साक्षात्कार में भारत के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने रोजमर्रा में भारत के आम जीवन पर बात की। उन्होंने बताया कि आज यूपीआई और ऑनलाइन बैंकिंग बड़े दुकानदार से लेकर छोटे स्ट्रीट वेंडर और ठेले वाले तक पहुंच चुकी है। हर व्यक्ति डिजिटल पेमेंट को अपना रहा है। ये डिजिटल युग में भारत की मजबूत पकड़ का उदाहरण है।

भारत के विकास मंत्र पर बोलीं पालकी
पालकी ने कहा कि भारत का काफी समय बाद राजनीतिक स्थिरता मिली है जिससे वह तेजी से विकास कर रहा है। नया भारत लगातार नेशनल हाईवे, एयरपोर्ट्स बनने के रेलवे का विस्तार और विकास कर रहा है। गांवों को भी शहरों से जोड़कर वहां तक सुविधा पहुंचा रहा है। गांव और शहर के बीच की इस खाई को भरना भारत के आर्थिक विस्तार को आगे बढ़ाने का की-फैक्टर था।

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पालकी ने ग्लोबल मच पर भारत को लेकर कही ये बात
पालकी शर्मा ने कहा कि भारत आम सहमति बनाकर आगे बढ़ने में विश्वास रखता है। यह डिप्लोमेटिक व्यवहार भारत को सुरक्षित भी रखता है। भार क्वाड और ब्रिक्स का नेतृत्व भी करता है। रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत व्यवहारिक कूटनीतिक दृष्टिकोण अच्छा उदाहरण है। उन्होंने पीएम मोदी का नया कश्मीर आर्थिक विकास और सामाजिक सुधारों को दर्शाता है। हाशिए पर रहने वालों का विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि 89 फीसदी मुस्लिम और ईसाई मोदी के भारत में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।

गलत सूचना मॉडल पर जताई नाराजगी
उन्होंने कहा कि पश्चिमी मीडिया की गलत सूचना फैलाने वाली वाली मशानों ने भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और जमीनी स्तर के सशक्तिकरण को कुचला है। भारत का ग्रास डोमेस्टिक प्रोडक्ट और प्रति व्यक्ति आय अपने उच्चतम स्तर पर है। कई मीडिया भारत में कुपोषण और गरीबी की कहानियों को बताते हैं।

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