
नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र के तीसरे दिन लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर लाए गए बिल (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) पर बहस के दौरान कांग्रेस नेता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने भाषण दिया। उन्होंने बिल का समर्थन किया और मांग किया कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए। सोनिया गांधी ने इसे अपने जीवन का बेहद मार्मिक क्षण बताया। आगे पढ़ें सोनिया गांधी का भाषण...
सोनिया गांधी ने कहा, "अध्यक्ष महोदय आपने मुझे बोलने की इजाजत दी, मैं आपकी बहुत आभारी हूं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तरफ से मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के समर्थन में खड़ी हुई हूं। धुएं से भरी हुई रसोई से लेकर, रौशनी से जगमगाते स्टेडियम तक, भारत की स्त्री का सफर बहुत लंबा है। लेकिन आखिरकार उसने मंजील को छू लिया है। उसने जन्म दिया, उसने परिवार चलाया, उसने पुरुषों के बीच तेज दौड़ लगाई और असीम धीरज के साथ अक्सर खुद को हारते हुए, लेकिन आखिरी बाजी में जीतते हुए देखा।
उन्होंने कहा, "भारत की स्त्री के हृदय में महासागर जैसा धीरज है। उसने खुद के साथ हुई बेईमानी की शिकायत नहीं की और सिर्फ अपने फायदे के बारे में कभी नहीं सोचा। उसने नदियों की तरह सबकी भलाई के लिए काम किया है और मुश्किल वक्त में हिमालय की तरह अडिग रही है। स्त्री के धैर्य का अंदाज लगाना मुश्किल है। वह आराम को नहीं पहचानती और थक जाना भी नहीं जानती। हमारे महान देश की मां है स्त्री। स्त्री ने हमें सिर्फ जन्म नहीं दिया है, अपने आंसुओं और खून-पसीने से सींचकर हमें अपने बारे में सोचने लायक बुद्धिमान और शक्तिशाली बनाया है।
सोनिया ने कहा, "स्त्री की मेहनत, गरिमा और त्याग की पहचान करके ही हमलोग मनुष्यता की परीक्षा में पास हो सकते हैं। आजादी की लड़ाई और नए भारत के निर्माण के हर मोर्चे पर स्त्री पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ी है। वह उम्मीदों, आकांक्षाओं, तकलीफों और घर-गृहस्ती के बोझ तले नहीं दबी। सरोजनी नायडू, सुचेता कृपलानी, अरुणा असफअली, विजय लक्ष्मी पंडित, राजकुमारी अमृतकौर और उनके साथ लाखों लाख महिलाओं से लेकर आज की तारीख तक, स्त्री ने कठिन समय में हर बार महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, बाबा साहेब अंबेडकर और मौलामा आजाद के सपनों को जमीन पर उतारकर दिखाया है। इंदिरा गांधी जी का व्यक्तित्व इस सिलसिले में बहुत ही रोशन और जिंदा मिसाल है।
सोनिया गांधी बोलीं- यह मेरे लिए बहुत मार्मिक क्षण
कांग्रेस नेता ने कहा, "खुद मेरी जिंदगी का यह बहुत मार्मिक क्षण है। पहली बार स्थानीय निकायों में स्त्री की भागीदारी तय करने वाला संविधान संसोधन मेरे जीवनसाथी राजीव गांधी लाए थे। राज्यसभा में वो प्रस्ताव सात वोटों से गिर गया था। बाद में प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने उसे पारित कराया। आज उसी का नतीजा है कि देशभर के स्थानीय निकायों के जरिए हमारे पास 15 लाख चुनी हुईं महिला नेता हैं। राजीव गांधी का सपना अभी तक आधा ही पूरा हुआ है। इस बिल के पास होने के साथ ही वह पूरा होगा। अध्यक्ष महोदय कांग्रेस पार्टी इस बिल का समर्थन करती है। हमें इस बिल के पास होने से खुशी है। मगर इसके साथ-साथ एक चिंता भी है।
उन्होंने कहा, "मैं एक सवाल पूछना चाहती हूं पिछले 13 वर्षों से भारतीय स्त्रियां अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी का इंतजार कर रहीं हैं। अब उन्हें कुछ वर्ष और इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है। कितने वर्ष 2-4-8, क्या? क्या भारतीय स्त्रियों के साथ यह बर्ताव उचित है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मांग है कि यह बिल फौरन अमल में लाया जाए, लेकिन इसके साथ ही कास्ट सेंसस कराकर SC, ST और OBC की महिलाओं के आरक्षण की भी व्यवस्था की जाए। सरकार को इसे साकार करने के लिए जो कदम उठाने की जरूरत है वो उठाने ही चाहिए। इस बिल को लागू करने में देर करना स्त्रियों के साथ घोर लापरवाही होगी।"
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