
नई दिल्ली। प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैरायटी एंड फॉमर्स राइट अथॉरिटी ने शुक्रवार को किसानों और बीज निगमों के हित में एतिहासिक फैसला सुनाया। उसने भारत में आलू की किस्म FL-2027 पर पेप्सिको (Pepsico) को मिला PVP (प्लांट वैरायटी प्रोटेक्शन) सर्टिफिकेट रद्द करने की याचिका स्वीकार कर ली। प्राधिकरण ने माना कि पेप्सिका को यह सर्टिफिकेट जिस आधार पर मिला था, वह गलत जानकारी के आधार पर मिला था। यानी, जिसे यह प्रमाणपत्र मिला था, वह इसकी पात्र नहीं है। प्राधिकरण द्वारा याचिका स्वीकार करने का मतलब यह है कि फरवरी 2016 में पेप्सिको को आलू की इस किस्म के लिए मिले वैराइटी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR)को प्राधिकरण वापस ले लेगा। प्राधिकरण ने माना कि पेप्सिको द्वारा किसानों को डराने-धमकाने की कोशिश की गई, जबकि बीज उगाना किसानों के अधिकार में आता है।
क्या है मामला :
2016 में पेप्सिको ने पैकेट बंद चिप्स में इस्तेमाल होने वाले आलू की वैरायटी FL-2027 का रजिस्ट्रेशन करवाया था। इसके तहत इस बीज के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स कंपनी के पास आ गए थे। 2018 में कंपनी ने इस किस्म के आलू के बीज उगाने पर गुजरात के 5 किसानों पर केस कर दिया। इसके बाद 2019 में फिर 4 किसानों पर केस किया गया। कंपनी ने इन सभी से 1.5- 1.5 करोड़ रुपए मुआवजा मांगा था। मीडिया में मामला आने के बाद बीज अधिकार मंच के केतन शाह ने इस मामले में दखल शुरू किया। एलायंस फॉस सस्टेनेबल एंड होलिस्टक एग्रीकल्चर (ASHA) की कविता कुरुगंती ने प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैरायटी एंड फॉमर्स राइट में पेप्सिको के खिलाफ आवेदन दिया। उस समय तो पेप्सिको पीछे हट गया, लेकिन वह किसानों को यह किस्म उगाने देने पर राजी नहीं था। 30 महीने तक चली सुनवाई के बाद शुक्रवार को इस मामले में फैसला किसानों के पक्ष में आया।
पेप्सिको के खिलाफ यह दलील
पेप्सको का सर्टिफिकेट रद्द करने के पीछे दलील दी गई कि आलू की किस्म पर कंपनी को दिया गया IPR निर्धारित प्रावधानों के अनुसार नहीं था। यह अधिकार पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण के मामले में भी जनहित में नहीं था। यह आवेदन जून 2019 में फाइल किया गया था। कंपनी के पास जनवरी 2022 तक यह अधिकार था और वह 31 जनवरी 2031 तक इसे नवीनीकरण करवा सकती थी। अब यह रद्द हो गया है।
FL-2027 किस्म की आलू की ये खासियत
आलू की इस किस्म का इस्तेमाल पेप्सिको लेज पोटेटे चिप्स बनाने के लिए करती है। आलू की इस किस्म में आर्द्रता अपेक्षाकृत कम होती है, जिसके कारण इसका इस्तेमाल चिप्स बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। कंपनी ने किसानों के खिलाफ पेटेंट के उल्लंघन का मामला दर्ज कराया था, जबकि नियम के अनुसार इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट मिलने से किसी बीज की किस्म को किसानों को उगाने से नहीं रोका जा सकता है।
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