
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मैसूर विश्वविद्यालय के शताब्दी सम्मेलन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, कोरोना के चलते लगे प्रतिबंधों के बावजूद इस सम्मेलन के उत्साह में कमी नहीं आई है। हालांकि, भारी बारिश ने इसे थोड़ा कम जरूर कर दिया है। मैं मैं प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त करता हूं। केंद्र और राज्य राहत देने के प्रयास कर रहे हैं। इस सम्मेलन में छात्र भी ऑनलाइन शामिल हुए।
पीएम ने कहा, साल 2014 से पहले देश में 16 आईआईटी थे। बीते सालों में औसतन हर साल एक नई आईआईटी खोली गई। इसमें से एक कर्नाटक के धारवाड़ में भी है। पीएम मोदी ने कहा, बीते पांच से छह साल में सात नए आईआईएम स्थापित किए गए हैं। जबकि उससे पहले देश में 13 आईआईएम ही थे। इसी तरह करीब छह दशक तक देश में सिर्फ सात एम्स देश में सेवाएं दे रहे थे। साल 2014 के बाद इससे दोगुने यानि 15 एम्स देश में या तो स्थापित हो चुके हैं या फिर शुरु होने की प्रक्रिया में हैं।
'मैसूर यूनिवर्सिटी भारत की आकांक्षाओं और क्षमताओं का प्रमुख केंद्र'
पीएम मोदी ने कहा, मैसूर यूनिवर्सिटी, प्राचीन भारत की समृद्ध शिक्षा व्यवस्था और भविष्य के भारत की आकांक्षाओं और क्षमताओं का प्रमुख केंद्र है। इस यूनिवर्सिटी ने राजर्षि नालवाडी कृष्णराज वडेयार और एम. विश्वेश्वरैया जी के विजन और संकल्पों को साकार किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, हमारे यहां शिक्षा और दीक्षा, युवा जीवन के दो अहम पड़ाव माने जाते हैं। ये हजारों सालों से हमारे यहां एक परंपरा रही है। जब हम दीक्षा की बात करते हैं, तो ये सिर्फ डिग्री प्राप्त करने का ही अवसर नहीं है। आज का ये दिन जीवन के अगले पड़ाव के लिए नए संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।
1916 में हुई थी मैसूर यूनिवर्सिटी की स्थापना
मैसूर यूनिवर्सिटी की स्थापना 1916 में हुई थी। यह कर्नाटक का पहला विश्वविद्यालय है। इसके साथ ही देश का छठा विश्वविद्यालय भी है।
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