
नई दिल्ली। पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक ओपन डिस्कशन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हमारी (महासागरों) यह साझी विरासत कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। समुद्री मार्गों का समुद्री डकैती और आतंकवाद के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। महासागर हमारी साझा विरासत हैं और हमारे समुद्री मार्ग अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की जीवन रेखा हैं। ये महासागर हमारे ग्रह के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि हमें समुद्री व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करना चाहिए। हमारी समृद्धि समुद्री व्यापार के सक्रिय प्रवाह पर निर्भर करती है और इस रास्ते में बाधाएं पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती बन सकती हैं। मुक्त समुद्री व्यापार अनादि काल से भारत की संस्कृति से जुड़ा हुआ है। हम सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के दृष्टिकोण के आधार पर अपने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा पर एक समावेशी ढांचा बनाना चाहते हैं। यह दृष्टि एक सुरक्षित, सुरक्षित और स्थिर समुद्री क्षेत्र के लिए है।
पीएम ने समुद्री सुरक्षा के लिए सुझाए पांच बुनियादी सिद्धांत
पीएम मोदी ने कहा कि समुद्री सुरक्षा के लिए, मैं 5 बुनियादी सिद्धांतों को सामने रखना चाहूंगा...1) वैध व्यापार स्थापित करने के लिए बाधाओं के बिना मुक्त समुद्री व्यापार। 2) समुद्री विवादों का निपटारा शांतिपूर्ण और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर ही होना चाहिए। तीसरा- जिम्मेदार समुद्री संपर्क को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। चौथा, गैर-राज्य अभिनेताओं और प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न समुद्री खतरों का सामूहिक रूप से मुकाबला करने की आवश्यकता है। और आखिरी9 हमें समुद्री पर्यावरण और समुद्री संसाधनों को संरक्षित करना है।
पीएम मोदी सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे थे। ‘समुद्री सुरक्षा बढ़ानेः अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए एक मामला‘ पर यूएनएससी की उच्च स्तरीय खुली बहस को मोदी संबोधित कर रहे थे। यूएनएससी की मीटिंग की पहली बार भारत का कोई प्रधानमंत्री अध्यक्षता कर रहा। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य भारत 8 दफा रह चुका है। अभी दस साल पहले भी भारत अध्यक्षता कर चुका है। दरअसल, 1 अगस्त को ही भारत के पास सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता आई है। पूरे अगस्त महीने तक भारत इसका अध्यक्ष रहेगा।
संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख अंग है सुरक्षा परिषद
संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations Organisation) यानी यूएनओ। इसके प्रमुख छह अंग हैं। यह प्रमुख अंग विभिन्न कार्याे को दुनिया भर में अंजाम देते हैं। दरअसल, दो-दो विश्व युद्ध व कई अन्य त्रासदियों को देख चुकी दुनिया में समन्वय स्थापित करने, शांति स्थापना और वैश्विक विकास को मैत्रीपूर्ण ढंग से गति देने के लिए एक ऐसी संस्था के स्थापना की मांग उठी जो सबको लेकर चल सके। संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के बाद शांति और सुरक्षा के लिए सुरक्षा परिषद की स्थापना 17 जनवरी 1946 में की गई थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पहले 11 सदस्य देश थे लेकिन बाद में 1965 में 15 की संख्या हो गई। इन 15 सदस्यों में 5 स्थायी सदस्य हैं।
कौन-कौन से देश सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं?
सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य देश हैं। 5 स्थायी और शेष देशों को अस्थायी सदस्यता दी गई है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन 5 स्थायी सदस्य हैं। स्थायी सदस्यों के पास वीटो पावर होता है। स्थायी सदस्य इसका इस्तेमाल कर किसी भी प्रस्ताव को पास होने से रोक सकते हैं। इनके अलावा सुरक्षा परिषद में 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। इन अस्थायी सदस्यों का चयन क्षेत्रीय आधार पर किया जाता है। अफ्रीका और एशियाई देशों से 5, पूर्वी यूरोपीय देशों से 1, लेटिन अमेरिकी और कैरिबियाई देशों से 2 और पश्चिमी यूरोपीय और अन्य 2 देशों का चयन किया जाता है।
कैसे बनते हैं अस्थायी सदस्य
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य वोटिंग से बना जाता है। जब दुनिया के सदस्य देशों का दो-तिहाई समर्थन मिलता है तो उस देश को अस्थायी सदस्य चुना जाता है। दो साल के लिए बहुमत वाले देश अस्थायी सदस्य बनते हैं। भारत इस साल जनवरी में ही यूएनएसी का अस्थायी सदस्य बना है। पिछले साल जून में हुई वोटिंग में भारत को 192 में से 184 वोट मिले थे। भारत 31 दिसंबर 2022 तक सुरक्षा परिषद का सदस्य रहेगा।
भारत सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष कैसे है?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता हर महीने बदलती रहती है। अंग्रेजी वर्णमाला के ऑर्डर के हिसाब से हर महीने नए सदस्य देश को अध्यक्षता मिलती है। भारत से पहले जुलाई में सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता फ्रांस के पास थी। सितंबर में आयरलैंड को यह जिम्मेदारी मिलेगी। अपने 2 साल के कार्यकाल में भारत 2 बार सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष बनेगा।
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