
PM Modi 2015 Pakistan visit: तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की जन्मदिन पर अफगानिस्तान से लौटते वक्त पाकिस्तान पहुंचे पीएम मोदी की देश में विपक्षी दल लगातार आलोचना करते रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इंडिया टीवी को दिए गए अपने इंटरव्यू में उस घटना को पाकिस्तान में एटम बम होने के कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के दावे से जोड़ते हुए जवाब दिया है। पीएम मोदी ने टीवी चैनल पर कहा कि उनकी ताकत तो मैं खुद लाहौर जाकर चेक कर आया हूं।
नवाज शरीफ को बधाई देने पाकिस्तान जाने पर क्या बोले पीएम मोदी?
पीएम मोदी ने टीवी चैनल पर कहा कि उनकी ताकत तो मैं खुद लाहौर जाकर चेक कर आया हूं। वहां पर एक रिपोर्टर बोल रहा था कि हाय अल्लाह तौबा, हाय अल्लाह तौबा। ये बिना वीजा के पाकिस्तान कैसे आ गए। मोदी ने कहा कि आखिर पाकिस्तान से क्या डरना। किसी जमाने में तो वह हमारा ही हिस्सा था।
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी एक टीवी चैनल को इंटरव्यू में मणिशंकर अय्यर के कथित बयान का जवाब दे रहे थे। एक चुनावी रैली में भी पीएम मोदी ने अय्यर के बयान का जिक्र करते हुए कहा था कि कांग्रेस के लोग पाकिस्तान की इज्जत करने और डरने की बात करते हैं। हम उन्हें चूड़ियां पहना देंगे। हम आखिर पाकिस्तान से क्यों डरें।
बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार में पाकिस्तान लगातार बना हुआ है और इसका जिक्र खूब हो रहा है। अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री व बीजेपी के जिम्मेदार नेता लगातार दोहरा चुके हैं कि हम अगली सरकार पीओके को वापस लेने का काम करेंगे।
2015 में प्रधानमंत्री बिना आमंत्रण के गए थे पाकिस्तान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2015 में बिना आमंत्रण के ही पाकिस्तान के लाहौर गए थे। पीएम मोदी, अफगानिस्तान से लौट रहे थे। उसी दौरान उनका विमान लाहौर लैंड हो गया। अचानक पहुंचे पीएम मोदी से पूरी दुनिया हैरान रह गई। वह लाहौर में उतरे थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की थी। नरेंद्र मोदी की यात्रा का उद्देश्य तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को जन्मदिन की बधाई देना था। वह 25 दिसंबर 2015 को पाकिस्तान गए थे। नवाज शरीफ से मुलाकात के बाद उन्होंने नवाज शरीफ की मां को मां को उपहार भी दिए थे।
दरअसल, पीएम मोदी की उस यात्रा को लेकर सवाल उठे तो कईयों ने दोनों देशों के बीच रिश्ता सुधारने को लेकर किया गया गंभीर पहल बताया। लेकिन उनकी यात्रा के बाद हालात में कोई परिवर्तन नहीं आया, उल्टे और स्थितियां खराब होती चली गईं। पठानकोट, उड़ी और फिर पुलवामा जैसे आतंकी हमलों के चलते पाकिस्तान और भारत के बीच संबंध सुधर नहीं सके।
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