
नई दिल्ली. भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध गांधीवादी नेता आचार्य बिनोवा भावे की जयंती है। इस मौके पर उन्हें देशभर में श्रद्धांजलि दी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भी tweet करके उन्हें नमन किया है।
गरीबों और दलितों के हितों के लिए किए आंदोलन
प्रधानमंत्री ने tweet में लिखा कि 'आज़ादी के बाद उन्होंने गांधीवादी सिद्धांतों को आगे बढ़ाया। उनके जन आंदोलनों का उद्देश्य गरीबों, दलितों के लिए जीवन की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करना था।'
मोदी ने एक अन्य tweet में लिखा-महात्मा गांधी ने उन्हें(बिनोवा भावे) एक ऐसे व्यक्ति के रूप में वर्णित किया, जो छुआछूत के बिल्कुल खिलाफ थे, भारत की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में अडिग थे और अहिंसा के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों में दृढ़ विश्वास रखते थे। वे उत्कृष्ट विचारक थे।
कई नेताओं ने किए ट्वीट
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, भाजपा नेता सतीश उपाध्याय, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव आदि ने भी tweet करके बिनोवा भावे को श्रद्धांजलि दी है।
भूदान आंदोलन चलाया था
आचार्य विनोबा भावे (11 सितम्बर 1895-15 नवम्बर 1982) का मूल नाम विनायक नारहरी भावे था। उन्हे भारत का राष्ट्रीय आध्यापक और महात्मा गांधी का आध्यातमिक उत्तराधिकारी माना जाता था। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्ष महाराष्ट्र के पोनार के आश्रम में गुजारे। भावे ने भूदान आन्दोलन चलाया। इंदिरा गांधी द्वारा घोषित इमरजेंसी को 'अनुशासन पर्व' कहने के कारण वे जरूर विवादों में आ गए थे।
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