
मुंबई. महाराष्ट्र में सरकार नई सरकार के गठन को लेकर सियासी दलों में माथापच्ची चरम पर है। एक ओर जहां बीजेपी -शिवसेना का गठबंधन लगभग टूट गया है। वहीं, शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की तैयारी में है। इसको लेकर सभी दलों के बीच बैठकों का दौर जारी है। जिसके बाद सरकार बनाए जाने को लेकर कोई निर्णय लिया जा सकता है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
अगला सीएम पिता- पुत्र या कोई और
शिवसेना के नए फार्मूले पर कवायद तेज है। रविवार शाम जब राज्यपाल द्वारा शिवसेना को सरकार बनाने का न्यौता दिया गया, उसके बाद से सीएम के नाम को लेकर चर्चा जोरों पर है। जिस के बाद कयास लगाया जा रहा कि शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे को सीएम बनाया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी चर्चा जोरों पर है कि शिवसेना के युवा नेता और पहली बार विधायक बने उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को सीएम की कुर्सी पर ताजपोशी की जा सकती है। इन सब के इतर सियासी गलियारे में चर्चा है कि शिवसेना प्रदेश का नेतृत्व करने के लिए सीएम की कुर्सी किसी और को दे सकती है। हालांकि, सीएम के नाम को लेकर पार्टी द्वारा कोई भी पत्ते नहीं खोले गए है।
नए गठबंधन में ऐसे हो सकता है बंटवारा
प्रदेश के बदले राजनीतिक हालात में शिवसेना के खाते में मुख्यमंत्री का पद जा सकता है। जबकि उप-मुख्यमंत्री का पद राकांपा की झोली में जा सकता है। वहीं, कांग्रेस को विधानसभा में अध्यक्ष का पद दिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने शिवसेना को संख्याबल के बारे में जानकारी देने के लिए सोमवार शाम 7:30 बजे तक का समय दिया है। ऐसे में उद्धव खुद सत्ता का समीकरण बनाने में जुटे हुए हैं। रविवार देर रात तक शिवसेना के बड़े नेताओं की मातोश्री में बैठक हुई। जिसके बाद सोमवार को भी ठाकरे विधायकों संग बैठक कर रहे है।
कांग्रेस भी कर रही मंथन
महाराष्ट्र में बदले सियासी समीकरण के बाद कांग्रेस पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई गई है। जिसमें सत्ता में भागीदार बनने को लेकर मंथन किया जा सकता है। हालांकि राजनीतिक गलियारे में चर्चा जोरों पर है कि कांग्रेस गठबंधन सरकार में शामिल होगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन, स्पीकर पद कांग्रेस के खाते में जा सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण इसके लिए पहली पसंद होंगे। 1999 में कांग्रेस और राकांपा ने ऐसे ही हालात में राज्य में सरकार का गठन किया था। इसके बाद दोनों दल 15 साल तक सत्ता में रहे थे।
शिवसेना के बदले सुर
शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस राज्य की दुश्मन नहीं है, हमारे बीच राजनीतिक मतभेद हैं लेकिन हम दुश्मन नहीं हैं। जिसके बाद से दोनों दलों के बीच सरकार बनने की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 35 से अधिक विधायकों ने शिवसेना के साथ सरकार बनाने के लिए रजामंदी जाहिर कर दी है।
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