
पीएम मोदी की परियोजनाएं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी लोकसभा चुनाव से पहले बीते कई दिनों से हजारों-लाखों करोड़ों की परियोजनाओं की आधारशिला और उद्घाटन कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज बुधवार (13 मार्च) को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत में 3 प्रमुख सेमीकंडक्टर परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। इस मौके पर पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इंडियाज़ टेकेड: चिप्स फॉर विकसित भारत कार्यक्रम को संबोधित किया। इसमें धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (DSIR) गुजरात, Outsourced Semiconductor Assembly and Test (OSAT) असम के मोरीगांव और गुजरात के साणंद की परियोजनाएं शामिल हैं।
3 परियोजनाओं की आधारशिला रखने के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने एक बयान में कहा कि वह इस अवसर पर देश भर के युवाओं को भी संबोधित करेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी ने भी अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में 13 मार्च 2024 एक विशेष दिन रहने वाला है। इसके लिए कल इंडियाज़ टेकेड: चिप्स फॉर विकसित भारत कार्यक्रम में भाग लूंगा और 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की तीन सेमीकंडक्टर सुविधाओं की आधारशिला रखेंगे।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में 60,000 से अधिक संस्थानों के छात्रों की भागीदारी होगी। मैं युवाओं और विशेष रूप से तकनीक के प्रति उत्साही लोगों से कल के कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह करूंगा।
PM मोदी के विजने के मुताबिक परियोजनाओं की आधारशिला
PMO के मुताबिक पीएम मोदी द्वारा परियोजनाओं की आधारशिला रखे जाने से देश के युवाओं के लिए रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे। इसे मोदी के विजन के तौर पर देखा जा रहा है, जो सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत को एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। भारत में सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने के लिए संशोधित योजना के तहत धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (DSIR) में सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (TEPL) द्वारा स्थापित की जाएगी।
91,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ ये देश के पहले कॉर्मशियल सेमीकंडक्टर फैब का प्रतीक होगा। वहीं असम के मोरीगांव Outsourced Semiconductor Assembly and Test (OSAT) में 27,000 करोड़ और गुजरात के साणंद में लगभग 7,500 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
केंद्र सरकार का सेमीकंडक्टर उद्योग को लेकर विजन
केंद्र सरकार ने भारत को सेमीकंडक्टर उद्योग में अग्रणी बनाने के लिए सेमीकंडक्टर विनिर्माण यूनिट के लिए भारत सेमीकंडक्टर मिशन की स्थापना की है। इसकी वजह से भारत का सेमीकंडक्टर इको-सिस्टम मजबूत होगा। इस यूनिट की मदद से सेमीकंडक्टर उद्योग में हजारों युवाओं को रोजगार मिलने के आसार बढेंगे। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक, दूरसंचार आदि जैसे संबंधित क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा देंगी।
कांग्रेस के राज में भारत सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में रहा पीछे
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल जुलाई में केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी थी कि आने वाले पांच वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग बढ़कर 300 अरब डॉलर का हो जाएगा। इसके साथ ही सेमी-कंडक्टर उद्योग में भी ऐसे ही वृद्धि देखने को मिलेगी। बता दें कि भारत 1960 के दशक से ही सेमी-कंडक्टर के क्षेत्र में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सफलता नहीं मिली।60 के दशक में नियामक और कांग्रेस के नौकरशाही बाधाओं के कारण देश फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर विनिर्माण संयंत्र से चूक गया।
इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था और अंतर्मुखी नीतियों ने कंपनियों को भारत पर विचार करने से रोका। इस क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा एक आशाजनक शुरुआत के बावजूद, भारत शुरुआती दिनों में प्रदर्शित अपार संभावनाओं को भुनाने में विफल रहा। हालांकि, अब बीजेपी के शासन में भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक मुख्य खिलाड़ी के तौर पर बनने की ओर अग्रसर नजर आ रहा है।
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