
बेंगलुरु. शिवमोग्गा के आमिर अहमद सर्कल में हिंदुत्व के प्रतीक वीडी सावरकर(Vinayak Damodar Savarkar) और 18वीं सदी के मैसूर के विवादास्पद शासक टीपू सुल्तान के फ्लेक्स लगाने को लेकर दो समूहों के बीच विवाद के कारण इलाके में तनावपूर्ण स्थिति के पीछे भी SDPI(Social Democratic Party of India) और PFI(Popular Front of India) की भूमिका सामने आई है। तनाव के बाद शहर में फिलहाल तीन दिन निषेधाज्ञा(धारा 144) यानी कर्फ्यू रहेगा। हालात सामान्य होने पर ही कर्फ्यू में ढील दी जाएगी। दो गुटों में झड़प के बाद पुलिस को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा था। अधिकारियों ने कहा कि शिवमोग्गा में 18 अगस्त तक निषेधाज्ञा जारी की है, जबकि शिवमोग्गा और 20 किमी दूर इसके औद्योगिक जुड़वां शहर भद्रावती में मंगलवार को स्कूल बंद रहेंगे। सशस्त्र पुलिस की तीस प्लाटून के साथ रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया है।
यह है पूरे विवाद का कारण
आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित एक तिरंगा रैली के दौरान एसडीपीआई और पीएफआई के संदिग्ध कुछ युवकों द्वारा शहर के अमीर अहमद सर्कल में वीर सावरकर के कट-आउट को फाड़कर नष्ट कर दिए जाने से शहर में हड़कंप मच गया था। इसके बाद बजरंग दल और अन्य समूहों के कुछ युवकों का भी दूसरे समूह के साथ झगड़ा हो गया, पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर किया। शिवमोग्गा SP लक्ष्मीप्रसाद ने कहा कि धारा 144 अगले तीन दिनों तक लागू रहेगी और तीन दिनों के बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इस घटना के बाद मंगलुरु तालुक के गुरुपुर के एक छोटे से शहर में भी कुछ तनाव देखा गया।
देश के 76वें स्वतंत्रता दिवस पर सोमवार को अमीर अहमद सर्कल में लगाए गए हिंदू आदर्शवादी वीडी सावरकर के पोस्टर को हटाने के प्रयासों के खिलाफ कर्नाटक के शिवमोग्गा में लोगों के एक समूह ने आपत्ति जताते हुए विवाद शुरू कर दिया था। टीपू सुल्तान के समर्थकों के एक समूह ने टीपू सुल्तान के पोस्टर को लगाने के लिए वीडी सावरकर के बैनर उतारने का प्रयास करने के बाद तनाव पैदा कर दिया। घटना को काबू में करने पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
विवाद के चलते निगम आयुक्त अक्षय श्रीधर के आदेश के बाद रविवार रात बैनर हटा लिया गया था। इससे पहले मंगलुरु उत्तर भाजपा विधायक वाई भरत शेट्टी के अनुरोध पर मंगलुरु नगर निगम ने पहले सावरकर के नाम पर सर्कल का नाम रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। औपचारिक रूप से सर्कल का नाम रखने के लिए नागरिक संगठन को अधिकारियों से मंजूरी का इंतजार है। श्रीधर के मुताबिक मंडल का नाम सावरकर के नाम पर रखने के प्रस्ताव को निगम परिषद ने मंजूरी दी थी।
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