पुणे: 3 साल की बच्ची से रेप-मर्डर, 65 साल के दोषी को मिली फांसी की सजा

Published : Jun 30, 2026, 01:00 AM IST
Public prosecutor Ajay Misar (Photo/ANI)

सार

पुणे की सत्र अदालत ने 3 साल की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में 65 साल के भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसे 'कोल्ड-ब्लडेड' और 'सुनियोजित हत्या' बताते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति पर कोई दया नहीं की जा सकती।

विशेष लोक अभियोजक एडवोकेट अजय मिसर ने सोमवार को बताया कि पुणे की एक सत्र अदालत ने महाराष्ट्र के नसरापुर गांव में तीन साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या के दोषी भीमराव कांबले को मौत की सजा सुनाई है।

मिसर ने एएनआई को बताया, "आरोपी भीमराव कांबले को सभी अपराधों का दोषी ठहराया गया है... अदालत ने मौत की सजा दी है और 137 पन्नों का फैसला सुनाया है... कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला है कि यह एक बहुत ही क्रूर, सुनियोजित हत्या है... अदालत ने कहा कि जब वह 65 साल की उम्र में वासना का इतना भूखा है, तो ऐसे व्यक्ति पर किसी भी तरह की दया नहीं की जा सकती, और आखिरकार, मौत की सजा दी गई।"

फास्ट-ट्रैक सुनवाई में मिला इंसाफ

पुणे ग्रामीण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, संदीप सिंह गिल ने कहा कि मामले की जांच और फास्ट-ट्रैक आधार पर सुनवाई के बाद अदालत ने मौत की सजा सुनाई है।

गिल ने कहा, "नसरापुर बलात्कार और हत्या का मामला 1 मई को हुआ था और 2 मई को एफआईआर दर्ज की गई थी... आरोपी को अदालत ने मौत की सजा दी है। अदालत ने फैसले में 'सोसाइटल कॉन्शियस' (societal conscious) नामक एक शब्द का विशेष रूप से उल्लेख किया है... जनता से वादा किया गया था कि मामले की निगरानी फास्ट-ट्रैक पर की जाएगी, और वही वादा पूरा किया गया है... आज, हमारे पास यह ऐतिहासिक फैसला है जहां आरोपी को पॉक्सो और बीएनएस की तीन अलग-अलग धाराओं में तीन मौत की सजा दी गई है।"

अभियोजन पक्ष ने रखीं मजबूत दलीलें

25 जून को, पुणे कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए फैसला सुनाया, जिसमें पुष्टि की गई कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ सभी आरोपों को संदेह से परे साबित कर दिया है। अदालत के इस निष्कर्ष के बाद कि आरोपी भारतीय न्याय संहिता की सभी संबंधित धाराओं के तहत दोषी है, कार्यवाही सजा के चरण की ओर बढ़ गई। अभियोजन और शिकायतकर्ता दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने आज के लिए अंतिम सजा का फैसला निर्धारित किया था।

विशेष लोक अभियोजक एडवोकेट अजय मिसर ने कहा कि अभियोजन टीम ने पूरे मुकदमे के दौरान अपराध की गंभीरता को प्राथमिकता दी। मिसर ने कहा, 'मामला आज अंतिम फैसले के लिए रखा गया था। अदालत ने अपना फैसला सुनाया। इस फैसले में, अभियोजन पक्ष ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपी के खिलाफ सभी आरोप संदेह से परे साबित हुए हैं। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपी आईपीसी की सभी धाराओं के तहत दोषी था और उसे दोषी घोषित किया।'

सुप्रीम कोर्ट के 12 फैसलों का दिया हवाला

अधिकतम संभव सजा की मांग पर जोर देने के लिए, अभियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के 12 ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया, जिसमें नाबालिगों से जुड़े जघन्य अपराधों के लिए मौत की सजा और मृत्युदंड की आवश्यकता पर चर्चा की गई है।

एडवोकेट मिसर ने उनकी दलीलों के न्यायिक स्वागत के बारे में कहा, 'अभियोजन पक्ष ने अदालत में सुप्रीम कोर्ट के 12 ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया, जिसमें ऐसे अपराधों के लिए मौत की सजा और मृत्युदंड की आवश्यकता पर बहस की गई थी, और अदालत इससे सहमत हुई।' (एएनआई)

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