
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Congress leader Rahul gandhi) ने अब स्टैच्यु ऑफ इक्वैलिटी (Statue of equality) पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बुधवार को एक ट्वीट कर कहा कि स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी मेड इन चाइना (Made in china) है। नया भारत चीन पर निर्भर है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार 5 फरवरी 2022 को तेलंगाना के हैदराबाद में स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी (Statue of Equality) का उद्घाटन किया है। रामानुजाचार्य जी की ये प्रतिमा उनके ज्ञान, वैराग्य और आदर्शों की प्रतीक बताई जाती है।
चीन की कंपनी ने ही बनाई प्रतिमा, भारत में इंस्टॉल हुई
राहुल के आरोप उस समय आए हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कांग्रेस पर मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की राह में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाया है। तो जानें, क्या वास्तव में स्टैच्यु ऑफ इक्वैलिटी मेड इन चाइना है या फिर राहुल के आरोप गलत हैं। दरअसल, राहुल गांधी ने जो बात कही है वह सही है। स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी चीन में ही बनी है। इसे बनाने का कॉन्ट्रैक्ट 2015 में हुआ था। इसे बनाने में 130 करोड़ और टैक्स यानी कुल मिलाकर 135 करोड़ रुपए का खर्च आया है। इसे बनाने का सारा काम चीन में हुआ और फिर इसे करीब 1,600 टुकड़ों में भारत लाया गया। भारत में इस स्टैच्यू को असेंबल किया गया। इसका इंस्टालेशन 2017-18 के बीच किया गया, जिसमें करीब 15 महीनों का समय लगा।
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हैदराबाद के जीवा कैम्पस में 2015 में हुए थे दस्तखत
statueofequality.org/the-statue-of-equality-negotiations-were-finalized/ यूआरएल वाले एक पेज पर इस संबंध में जानकारी दी गई है। 14 अगस्त 2015 की तारीख में इसमें वह फोटो और जानकारी दी गई है, जब स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी के संबंध में बातचीत को अंतिम रूप दिया गया और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए! पेज पर दी गई जानकारी में कहा गया है कि इसके लिए दुनियाभर में ऐसे वेंडरों की तलाश की गई जो सबसे ऊंची मूर्तियां बनाते हैं। इसमें साफ लिखा है कि ऐसी मूर्तियां बनाने में चीन अग्रणी है। हमारी ओर से आर्किटेक्चर, इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रों के विशेषज्ञ चीन का दौरा करने लगे। शुरुआत में उनके ब्रांड COSIC के तहत केवल एक कंपनी AEROSUN Corporation थी।
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पहले गंभीर नहीं था चीन, बाद में लिया टेंडर
इसमें बताया गया है कि शुरुआती बातचीत के दौरान वे हमारे प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर नहीं थे। बाद में उन्होंने कुछ जानकारी दी। 3-4 बार यहां आने के बाद उन्होंने गंभीरता को समझा और कोटेशन के साथ आए, जो लगभग 130 करोड़ रुपए और टैक्स था। बाद में कुछ और कंपनियां स्टैच्यू बनाने के अपने प्रस्ताव लेकर आईं। एक भारतीय कंपनी भी इस दौड़ में शामिल हुई। सभी कंपनियों को हैदराबाद में व्यक्तिगत बातचीत के लिए बुलाया गया। अगस्त 2015 की 12, 13 और 14 तारीख को उनकी बैठकें हुईं। लेकिन, आखिर में काम चीन की कंपनी एरोसन को काम दिया गया।
बैठी मुद्रा वाली दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची प्रतिमा
अगर दुनिया भर की बैठी मुद्रा वाली प्रतिमाओं से तुलना की जाए तो स्टैच्यू ऑफ इक्वैलिटी दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची प्रतिमा है। इसकी ऊंचाई 216 फीट है। इसमें कॉपर, सिल्वर, गोल्ड, जिंक और टाइटेनियम का मिश्रण इस्तेमाल किया गया है।
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