गहलोत सरकार ने भेजा राज्यपाल को प्रस्ताव, 31 जुलाई को सत्र कराने की मांग; 3 शर्तों पर भी दिया जवाब

Published : Jul 28, 2020, 11:32 AM ISTUpdated : Jul 28, 2020, 03:53 PM IST
गहलोत सरकार ने भेजा राज्यपाल को प्रस्ताव, 31 जुलाई को सत्र कराने की मांग; 3 शर्तों पर भी दिया जवाब

सार

राजस्थान का सियासी दंगल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। इसी बीच मंगलवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर कैबिनेट बैठक बुलाई। बैठक में सत्र बुलाने के लिए तीसरी बार प्रस्ताव पास हो सकता है।

जयपुर. राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार ने एक बार फिर राज्यपाल को विधानसभा सत्र बुलाने के लिए प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में 31 जुलाई को सत्र बुलाने की मांग की गई है। इसके अलावा इसमें राज्यपाल की 3 शर्तों पर भी जवाब दिया गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर कैबिनेट बैठक बुलाई थी। इस बैठक में सत्र बुलाने के लिए तीसरी बार प्रस्ताव पास हुआ।

इससे पहले राज्यपाल कलराज मिश्र ने दोनों बार प्रस्ताव लौटा दिया। पहली बार में उन्होंने 6 आपत्तियां दर्ज कराई थीं। वहीं, दूसरी बार उन्होंने सही जानकारी और सवालों के जवाब ना होने के चलते प्रस्ताव लौटा दिया था।

राज्यपाल ने दिया सत्र बुलाने का आदेश, लेकिन रखीं 3 शर्तें
राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने गहलोत सरकार को विधानसभा सत्र बुलाने का आदेश दे दिया है। राज्यपाल ने कहा, उनका कभी इरादा नहीं था कि सत्र को टाला जाए। हालांकि, राज्यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाने के लिए 21 दिन के नोटिस समेत 3 शर्तें रखी हैं। 

  • विधानसभा का सत्र 21 दिन का नोटिस देकर बुलाया जाए। इससे भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों की मूल भावना के अंतर्गत सभी को समान अवसर की उपलब्धता हो सके। 
  • यदि किसी परिस्थिति में विश्वास मत हासिल करने की विधानसभा सत्र में कार्रवाई की जाती है तो ऐसी परिस्थितियों में जबकि विधानसभा स्पीकर द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। विश्वास मत की कार्रवाई संसदीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की उपस्थिति में की जाए। इसकी पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग भी हो। विश्वास मत का लाइव प्रसारण भी किया जाए। 
  •  विश्वास मत के दौरान सदन में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किया जाए।


गहलोत को जवाब देना का सही वक्त- मायावती
राजस्थान का सियासी दंगल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। भाजपा के बाद अब कांग्रेस और बसपा में आरोप प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो गई है। बसपा सुप्रिमो मायावती ने कहा, BSP के 6 विधायकों का कांग्रेस में शामिल कराना असंवैधानिक था। हम इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे। उन्होंने कहा, गहलोत की मंशा से हमारी पार्टी को बहुत नुकसान पहुंचा। लेकिन अब उन्हें सबक सिखाने का वक्त आ गया है। जरूरत पड़ी तो हम इस मामले में हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। 

प्रियंका गांधी ने साधा बसपा पर निशाना
उधर, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बसपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, भाजपा के अघोषित प्रवक्ताओं ने भाजपा को मदद की व्हिप जारी की है। लेकिन ये केवल व्हिप नहीं है बल्कि लोकतंत्र और संविधान की हत्या करने वालों को क्लीन चिट है।

 

 

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