
भोपाल. कोरोना महामारी की दूसरी लहर का असर कम हो चुका है लेकिन कोरोना का खतरा अभी भी बना हुआ है। जरा सी लापरवाही आपको कोरोना से पीड़ित कर सकती है। अब कई राज्य अनलॉक हो चुके हैं। ऐसे में दुकानें खुलने लगी हैं। लोग मास्क के साथ बाहर दिख रहे हैं। लेकिन ठीक एक महीना पहले देश में संक्रमण का डराने वाले हालात थे। हॉस्पिटल में बेड नहीं मिल रहे थे। ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए लोग घंटों लाइन लगाकर इंतजार करते थे। कोरोनाकाल काल सबसे डराने वाली स्थिति बन गई थी उस समय लोगों ने जरा सी लापरवाही बरती और इसके शिकार हो गए। आज ऐसे ही एक व्यक्ति की कहानी बताते हैं जिन्होंने कोरोना से लड़ाई और जीत हासिल की।
Asianet News Hindi के संवाददाता श्रीकांत सोनी ने मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के रहने वाले आशुतोष मालवीय से बात की। उन्होंने बताया कि कोरोनाकाल में अस्पताल जाने की वजह से संक्रमित हुए और उसके बाद पूरे 14 दिन तक कोरोना से लड़ाई लड़ी।
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''मेरा नाम आशुतोष मालवीय है। मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील का रहने वाला हूं। कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी के लिए भोपाल में हूं। भोपाल में ही मेरे एक दोस्त के बच्चे को पीलिया हो गया था। उन्होंने बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया था। उन्हें ब्लड की अर्जेंट आवश्यकता थी। उन्होंने मुझसे कहा- तुम आ सकते हो? हमीदिया ब्लड डोनेट करने चला गया। इसके बाद मुझे बहुत तेज बुखार, शरीर में जकड़न महसूस होने लई। समझ नहीं आ रहा था कि ये क्या हो रहा है। जैसे ही शुरुआती लक्षण दिखाई दिए, मैंने बिना समय व्यर्थ किए कोरोना की जांच करवा ली। 17 मार्च 2021 को जय प्रकाश नारायण हॉस्पिटल में RT PCR जांच कराई। रिपोर्ट जब तक नहीं आई, तब तक होम आइसोलेशन में रहा।''
कब पता चला आपको कोरोना हो गया है?
19 मार्च को रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। डिस्ट्रिक्ट कोविड-19 अथॉरिटी से मेरे पास कॉल आया कि आपकी रिपोर्ट पॉजिटिव है और आप घर पर ही क्वारंटाइन हो जाइए। क्वारंटाइन होकर अपना जल्द से जल्द इलाज शुरु कर दीजिए। कुछ भी दिक्कत होने पर हमें सूचना दें।
कोरोना के लक्षण क्या क्या दिखे आप में?
टेस्ट और स्मेल सेंस बिल्कुल खत्म हो गए थे। किसी चीज की स्मेल आ ही नहीं रही थी। टेस्ट भी बिल्कुल नहीं आ रहा था। बहुत तेज बुखार, शरीर में अकड़न थी, लेकिन खांसी और सर्दी जैसी चीजें नहीं थी।
कोरोना का इलाज क्या क्या किया?
पॉजिटिव सोच के साथ होम आइसोलेशन में रहकर, डॉक्टर की सलाह से जो दवाइयों को प्रॉपर लिया। डॉक्टर के संपर्क में रहा। काढ़ा, आरोग्य वटी, गिलोय वटी का भी नियमित सेवन किया। डॉक्टर और जो साथी पहले पॉजिटिव रह चुके हैं, उनकी सलाह थी की प्रोटीन रिच डाइट का विशेष ध्यान रखना। मैंने ब्राउन ब्रेड, दूध, दाल आदि को अपनी डाइट में विशेष महत्व दिया। हरी सब्जियां और फलों को शामिल किया।
क्वारंटाइन में कैसे समय निकाला?
क्वारंटाइन में समय निकालना सबसे मुश्किल काम था, क्योंकि मेरी हॉबीज भी ग्रुप एक्टिविटी, सोशल सर्विस, टीम स्पोर्ट्स जैसी है। अकेले समय निकालना बहुत मुश्किल हो रहा, परंतु मैंने इस समय का सदुपयोग करते हुए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा संबंधित तैयारियां की। श्रीमद्भगवद्गीता और विवेकानंद की जीवनी पर लिखी हुई पुस्तकें पढ़ीं। कुछ विशेष साथी जो कि हमें सकारात्मक वाइब्स देते हैं, उनसे भी समय-समय पर बातचीत करता रहा। इस संक्रमण काल में सकारात्मक रहना सबसे आवश्यक था, इसलिए मैं सोशल मीडिया पर फॉरवर्डेड मैसेज और वीडियो से दूर रहा।
क्वारंटाइन में क्या क्या किया?
इस क्वारंटाइन पीरियड में मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे कि मेरी सकारात्मकता भंग हो। इंटरनेट या सोशल मीडिया पर भी मैं सकारात्मक चीजें ही देख रहा था। घर पर बात, साथियों से फोन पर बात की, क्योंकि शरीर को इस बीमारी से हील करने के लिए सकारात्मकता की विशेष आवश्यकता थी।
क्वारेनटाइन में क्या नया किय़ा?
अध्यात्म और योग की तरफ मेरा काफी झुकाव रहा है। काफी सारी चीजों को व्यस्तता या अन्य कारणों से हम अपनी दिनचर्या में नहीं शामिल कर पाते, जैसे नियमित योग करना, अपने विचारों को लिखना, चिंतन-मनन आदि। मैंने इन्हीं चीजों को अपने क्वारंटाइन पीरियड में दिनचर्या में शामिल किया। मैंने श्रीरामचरितमानस, श्रीमद्भागवत गीता और विवेकानंद की जीवनी का अध्ययन भी किया।
दोस्तों का क्या सपोर्ट था?
नेहरू युवा केंद्र के जिला युवा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र शुक्ला, जिला सलाहकार समिति की सदस्य हर्षा हासवानी, राहुल तिवारी, अंकित सिंह, शुभम चौहान, प्रवीण यादव आदि का दवा पहुंचाने से लेकर, दूध फल सब्जी जैसी जरूरत की मुख्य चीजें पहुंचाने का पूरा श्रेय देना चाहूंगा। ना सिर्फ भौतिक आवश्यकता की चीजें बल्कि मानसिक रूप से भी सभी साथियों का मुझे इस बीमारी से लड़ने में जो संबल दिया गया, वह नहीं होता तो शायद मैं अकेले रहकर ठीक ही नहीं हो पाता।
लोगों को क्या मैसेज देना चाहेंगे?
युवा साथियों को मैं यही संदेश देना चाहूंगा की कोरोना से यह जंग विशेष रूप से मानसिक है। मन की शक्ति को विकसित करके कोरोनावायरस को हरा सकते हैं। अंत में मेरा यही संदेश है कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। यह भी किसी सामान्य बीमारी जैसी है जिससे ठीक हुआ जा सकता है। हमने देखा कि 90-100 के बुजुर्ग भी इस बीमारी को हराकर लौट रहे हैं, हम तो युवा हैं। हममें कुछ भी कर जाने की, कुछ भी सह जाने की, किसी से भी लड़ जाने की क्षमता है।
Asianet News का विनम्र अनुरोधः आईए साथ मिलकर कोरोना को हराएं, जिंदगी को जिताएं...। जब भी घर से बाहर निकलें माॅस्क जरूर पहनें, हाथों को सैनिटाइज करते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वैक्सीन लगवाएं। हमसब मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग जीतेंगे और कोविड चेन को तोडेंगे। #ANCares #IndiaFightsCorona
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