
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में बेटियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष करने का मसौदा पेश किया है। इसके लिए बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक 2021 पेश किया गया है। अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) ने मुस्लिम महिलाओं की शादी की उम्र बढ़ाने के लिए देशभर में अभियान चलाने की प्लानिंग की है। यह मंच मुस्लिम महिलाओं की शादी की न्यूनतम आयु बढ़ाने के लिए पर्सनल लॉ में संशोधन करने के लिए अभियान चलाएगा। इस अभियान के दौरान मुस्लिमों को शादी की न्यूनतम आयु बढ़ाने के पीछे की वजहें बताई जाएंगी।
12- 13 की उम्र में हो रही बच्चियों की शादी
मुस्लिम मंच का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं की शादी कम उम्र में ही हो जाती है, क्योंकि शरिया कानून के तहत तरुणाई प्राप्त करने पर वह विवाह के योग्य हो जाती हैं। ग्रामीण इलाकों में 12-13 वर्ष की उम्र में ही लड़कियों की शादी हो जाती है और 20 की उम्र होने तक उनके कई बच्चे हो जाते है। यह लड़कियों के लिए किसी भी तरह से उचित नहीं है।
मंच ने कहा कि देश में मुस्लिम समाज तीन तलाक, हलाला, बहुविवाह और युवावस्था में लड़कियों की शादी जैसी कुरीतियों के दुष्प्रभावों से अवगत हो गया है। इन मामलों पर अब देशव्यापी चर्चा की जाएगी। इसी पहल के तहत संघ का मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मस्जिदों में महिलाओं के नमाज अदा करने के लिए अलग से स्थान बनाने की मांग करेगा।
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इन शहरों में किया दौरा
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की टीम ने इस पहल को शुरू करने के लिए यूपी के गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अमरोहा, देवबंद, बरेली, रामपुर, बिजनौर, शाहजहांपुर, संभल, बहराइच, अलीगढ़, कैराना, आगरा, कानपुर, लखनऊ, फैजाबाद, सहारनपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, गोंडा, बस्ती, सिद्धार्थनगर, वाराणसी, मऊ, देवरिया, देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर जिलों का दौरा किया है। मंच ने कहा कि देश और समाज के उत्थान के लिए हम पूरे देश में जन जागरण अभियान चलाएंगे।
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