
Russian oil import: रूस से तेल आयात करने के चलते अमेरिका ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। कुल टैरिफ 50% है। इससे भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव आया है। इस बीच भारत के लिए रूस से खुशखबरी आई है। चीन में SCO समिट के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई थी।
इसके बाद रूस ने भारत को कच्चे तेल पर बड़ा डिस्काउंट दिया है। भारत के लिए रूसी तेल की कीमत 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार सितंबर के अंत और अक्टूबर में लोड होने वाले कार्गो के लिए रूस के यूराल ग्रेड के तेल की कीमत कम रखी जा रही है।
ट्रंप ने पिछले सप्ताह भारत पर टैरिफ दोगुना करके 50% कर दिया ताकि भारत को रूसी तेल खरीदने से रोका जा सके। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का प्रमुख आयातक बन गया है। चीन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि रूस और भारत के बीच "विशेष" संबंध हैं। इसी क्रम में उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की और दोनों देशों ने प्रतिद्वंदी नहीं, बल्कि साझेदार बनने का संकल्प लिया।
व्हाइट हाउस के सलाहकार पीटर नवारो ने रूसी तेल खरीदने के चलते भारत की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा, "पुतिन द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण करने से पहले भारत रूस से बहुत कम तेल खरीदता था। अब भारत रूस से कम कीमत में कच्चा तेल खरीद रहा है। उसे रिफाइन कर यूरोप, अफ्रीका और एशिया में बेचता है। इससे रूसी युद्ध मशीन को ईंधन मिलती है।"
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भारत ने यह कहते हुए इसका विरोध किया है कि तेल खरीद पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अमेरिका ने खुद रूसी तेल पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। अगस्त की शुरुआत में खरीदारी में थोड़े समय के विराम के बावजूद भारतीय रिफाइनर रूसी तेल का आयात जारी रखे हुए हैं। पिछले सप्ताह रूसी तेल भारत को 2.50 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर पेश किया जा रहा था। यह जुलाई की 1 डॉलर की छूट से ज्यादा है।
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