
नेशनल डेस्क। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक इंटरव्यू के दौरान भारत में मुस्लिम तुष्टीकरण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश में पिछली सरकारों में मुस्लिम तुष्टिकरण पहले हावी दिखता था। मैं पहले आईएफएस अधिकारी रह चुका हूं इसलिए कहना चाहूंगा कि पहले भारत की विदेश नीति पर भी मुस्लिम तुष्टिकरण का प्रभाव दिखता था।
विदेश मंत्री 'टॉप एंगल विद सुशांत सिन्हा' कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए जयशंकर ने कहा कि पहले की सरकारों की ओर से देश के अंदर और बाहर दोनों जगह वोटबैंक की राजनीति चल रही थी। कभी कोई ऐसा कड़ा फैसला पिछली सरकारों की ओर से नहीं लिया गया जिसमे मुस्लिम वोटों के बारे में न सोचा गया हो।
जयशंकर ने पाकिस्तान का उदाहरण देकर समझाया
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पिछली सरकार सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर राजनीति कर रही थी। उन्होंने कहा कि आपको नहीं लगता कि पहले की पाकिस्तान नीति और आज की पाक विदेश नीति में काफी अंतर है। पहले पाकिस्तान को लेकर बनी विदेश नीति में क्या आपको वोट बैंक की नीति के संकेत नहीं दिखते थे?'
इजरायल से क्यों दूरी बनाए रखी थी…
उन्होंने कहा कि इजराइल वर्ष 1948 में आजादा हुआ था, लेकिन भारतीय राजदूी की तैनाती वहां 1992 तक नहीं की गई थी। भारत ने वहां अपना राजदूत नहीं भेजा। यहां तक कि जब आपने 1992 में इजराइल में अपना दूत भेजा भी तो 2017 तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने वहां एक भी बार दौरा भी किया। वहां जा कर देखते? इजराइल बहुत बड़ा देश है। इजरायल के साथ संबंध अच्छे बनते। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की बात आने पर आप इजराइल जैसे देश को दूर रखते हैं। अब भी जब 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल में आतंकवादी हमला हुआ इजराइल में हुआ तो भी यहां की कुछ पार्टियां इसे आतंकी हमला स्वीकार नहीं कर रही थीं। दुनिया जान चुकी है कि ऐसी पार्टियों की राजनीति का आधार क्या है।
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