सबरीमाला गोल्ड चोरी केस: SIT ने TDB कमिश्नर को पकड़ा, असली गुनहगार कौन?

Published : Nov 08, 2025, 07:41 AM IST
sabarimala gold theft case

सार

Breaking Update: सबरीमाला गोल्ड चोरी केस में SIT ने पूर्व तिरुवाभरणम कमिश्नर को गिरफ्तार किया है। सोने की परतों को तांबे के रूप में दर्ज करने की साजिश का खुलासा हुआ। केरल में राजनीति और आस्था दोनों पर मचा तूफान।

Sabarimala Gold Theft Case: केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़ा गोल्ड चोरी मामला दिन-ब-दिन और गहराता जा रहा है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस केस में अब पूर्व तिरुवाभरणम कमिश्नर के.एस. बैजू को गिरफ्तार कर लिया है। बैजू वही अधिकारी हैं जो त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के तहत मंदिरों की सभी कीमती चीज़ों के ऑफिशियल कस्टोडियन रहे हैं। शुक्रवार को कोर्ट ने उन्हें 21 नवंबर तक रिमांड पर भेज दिया।

क्या मंदिर के सोने को तांबा दिखाकर बाहर निकाला गया?

जांचकर्ताओं का कहना है कि बैजू के कार्यकाल में एक बड़ी साजिश रची गई। उन्होंने द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल कट्टिला पैनल की सोने की परत वाली चादरों को ऑफिशियल रिकॉर्ड्स में तांबे की चादरों के रूप में दर्ज किया। इसी दस्तावेज़ी हेरफेर का फायदा उठाकर मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने मंदिर के असली सोने को बदल दिया और बाहर तस्करी से भेज दिया।

SIT का खुलासा: "महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों पर साइन गायब"

SIT की रिपोर्ट के मुताबिक, बैजू ने हैंडओवर ऑर्डर पर साइन नहीं किए, और जब मंदिर से सोने की परत वाली वस्तुएं हटाई गईं, तो वह मौके पर मौजूद भी नहीं थे। जांच एजेंसियों को शक है कि यह सब जानबूझकर किया गया ताकि किसी को शक न हो। हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल कमिश्नर तक भी यह अनियमितताएं नहीं पहुंच सकीं।

बाकी अधिकारी भी जांच के घेरे में?

  • इस मामले में दो और पूर्व अधिकारी मुरारी बाबू और सुधीश कुमार भी SIT की कस्टडी में हैं।
  • पूर्व TDB अध्यक्ष एन. वासु से भी जल्द पूछताछ की जा सकती है।
  • हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद, जांच और तेज़ी से आगे बढ़ाई जा रही है।

तीर्थयात्रा सीजन से पहले राजनीतिक भूचाल

यह मामला अब सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं रहा-सबरीमाला गोल्ड चोरी ने केरल की राजनीति को भी हिला दिया है। बीजेपी ने “सबरीमाला की संपत्ति की सुरक्षा” के लिए एक करोड़ सिग्नेचर कैंपेन शुरू किया है और प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस भी 12 नवंबर को “सेक्रेटेरिएट मार्च” निकालने जा रही है, जिसमें सरकार पर TDB में भ्रष्टाचार छिपाने के आरोप लगाए जाएंगे। इस बीच, CPI(M) ने भी त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पुनर्गठन की सिफारिश की है कि जो इस मुद्दे को और संवेदनशील बना देता है। स्थानीय निकाय चुनावों से पहले यह विवाद एक बार फिर राजनीतिक केंद्र बिंदु बन गया है।

  • क्या मंदिर की संपत्ति को तांबे के रूप में दर्ज कर बाहर भेजा गया?
  • SIT के मुताबिक, बैजू ने दस्तावेज़ों में हेराफेरी कर सोने की परत वाली मूर्तियों को तांबे की बता दिया।
  • SIT के निशाने पर और कौन-कौन से अधिकारी?
  • दो पूर्व अधिकारी मुरारी बाबू और सुधीश कुमार को भी रिमांड पर भेजा गया है।
  • क्या यह मामला केरल की राजनीति को हिला देगा?
  • BJP और कांग्रेस दोनों ने सरकार पर आरोप लगाते हुए आंदोलन तेज़ कर दिया है।
  • हाई कोर्ट और देवस्वोम बोर्ड की भूमिका क्या है?
  • हाई कोर्ट की सख्ती के बाद देवस्वोम बोर्ड के पुनर्गठन की सिफारिश की गई है।

 

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