
नई दिल्ली. राजस्थान संकट में हाईकोर्ट में सुनवाई टल गई है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से और वक्त मांगा। उन्होंने कहा, याचिका में और सुधार करना है। हालांकि कुछ देर बाद फिर से सुनवाई शुरू हुई। बता दें कि बुधवार को स्पीकर सीपी जोशी ने सचिन पायलट सहित उनके बागी विधायकों के खिलाफ नोटिस जारी किया था, जिसके खिलाफ सचिन पायलट का समर्थन करने वाले विधायकों ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई और नोटिस को रद्द करने की मांग की। सुनवाई कल तक के लिए टल गई है।
अपडेट्स
- संशोधन याचिका स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के लिए रेफर कर दी।
- सुनवाई के दौरान सचिन पायलट गुट ने याचिका में संशोधन के लिए समय मांगा। फिर 5.30 बजे सुनवाई शुरू हुई।
- नोटिस मामले में सतीशचन्द्र शर्मा की बेंच में सुनवाई में स्पीकर सीपी जोशी की ओर से कांग्रेसी नेता और जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी और पायलट खेमे से हरिश साल्वे पैरवी कर रहे थे।
- सचिन पायलट गुट की ओर से राजस्थान हाईकोट में फिर से हुई सुनवाई के बाद सतीश शर्मा की अदालत ने मामला डबल बेंच को रेफकर दिया।
- हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सचिन पायलट की तरफ से हरीश साल्वे ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा, सदन से बाहर के मामले में विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी नहीं कर सकते हैं, ऐसे में ये अवैध है। नोटिस को तुरंत रद्द किया जाए।
- बागी विधायकों ने कोर्ट ने कहा है कि व्हिप तब लागू होता है जब विधानसभा चल ही हो। अगर किसी होटल में विधायकों की मीटिंग हो रही है तो वहां व्हिप लागू नहीं होता।
- सचिन पायलट का समर्थन करने वाले विधायक पृथ्वीराज मीणा ने स्पीकर के उस नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती दिया है, जिसमें उनसे जवाब मांगा गया है। मामले की सुनवाई आज दोपहर 3 बजे होगी। हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए।
क्यों जारी हुआ नोटिस?
अशोक गहलोत सरकार ने दो दिन लगातार विधायक दल की बैठक बुलाई। इस बैठक के लिए बकायदा व्हिप जारी किया गया था। लेकिन सचिन पायलट सतिन उनका समर्थन करने वाले विधायक बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके बाद कांग्रेस के महेश जोशी ने स्पीकर सीपी जोशी से शिकायत की। इसके बाद बागी विधायकों को नोटिस जारी किया गया और 17 जुलाई की दोपहर 1 बजे तक जवाब मांगा है।
किन-किन विधायकों को जारी हुआ नोटिस?
विधायकों से जवाब मिलने के बाद स्पीकर आगे की कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि सचिन पायलट के गुट का कहना है कि हमने व्हिप का उल्लंघन नहीं किया है। जिन विधायकों को नोटिस जारी किया उसमें सचिन पायलट, रमेश मीणा, इंद्राज गुर्जर, गजराज खटाना, राकेश पारीक, मुरारी मीणा, पी आर मीणा, सुरेश मोदी, भंवर लाल शर्मा, वेदप्रकाश सोलंकी, मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया, हरीश मीणा, बृजेन्द्र ओला, हेमाराम चौधरी, विश्वेन्द्र सिंह, अमर सिंह, दीपेंद्र सिंह और गजेंद्र शक्तावत शामिल हैं।
व्हिप क्या होता है?
संसदीय प्रणाली में व्हिप एक आदेश होता है। जब संसद या विधानसभा में पार्टी के सदस्य एक महत्वपूर्ण वोट के लिए उपस्थित हो, या वे केवल एक विशेष तरीके से मतदान करते हैं। वहां सदस्यों को उपस्थित होने के लिए व्हिप जारी किया जाता है। आसान शब्दों में समझे तो व्हिप जारी करने का मतलब है कि आप (विधायक या सांसद) कहीं भी हो, उन्हें आना ही होगा।
- भारत में सभी पार्टियां अपने सदस्यों को व्हिप जारी कर सकती हैं। पार्टियों ने व्हिप जारी करने के लिए अपने सदन के सदस्यों में से एक वरिष्ठ सदस्य की नियुक्ति की। इस सदस्य को मुख्य व्हिप कहा जाता है, और उसे अतिरिक्त व्हिप द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।
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