
Shiv Sena UBT symbol: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के जलते हुए मशाल को लेकर खड़े हुए एक नए बवाल को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुलझा दिया है। समता पार्टी ने इस चुनाव चिह्न पर अपना दावा करते हुए शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट से छीनने की मांग की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने समता पार्टी के दावे को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दल चुनाव चिह्नों को अपनी संपत्ति नहीं मान सकते हैं। यदि किसी पार्टी का प्रदर्शन खराब रहता है तो चुनाव चिह्न के उपयोग का अधिकार वह खो सकती है।
समता पार्टी ने चुनाव चिह्न पर किया था दावा
हाईकोर्ट में समता पार्टी ने अपील की थी कि जलता हुआ मशाल शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट को आवंटित न किया जाए क्योंकि वह सिंबल उनका है और समता पार्टी पूर्व में इसी सिंबल पर चुनाव लड़ चुकी है। लेकिन कोर्ट ने समता पार्टी के दावे को खारिज करते हुए इसे किसी भी पार्टी की प्रॉपर्टी होने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि भले ही समता पार्टी के सदस्यों को जलता हुआ मशाल सिंबल के उपयोग की अनुमति दी गई थी लेकिन 2004 में पार्टी की मान्यता रद्द किए जाने के बाद सिंबल को स्वतंत्र कर दिया गया था। इसे चुनाव आयोग को किसी को भी आवंटित करने का अधिकार है।
सुब्रमण्यम स्वामी के मामले का भी किया जिक्र
चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत निर्वाचन आयोग मामले में सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले का भी उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सिंबल किसी दल की प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं है। न ही यह कोई धन है। यह केवल प्रतीक है जो विशेष राजनीतिक दल से जुड़ा है ताकि लाखों निरक्षर मतदाताओं को किसी विशेष पार्टी से संबंधित अपनी पसंद के उम्मीदवार के पक्ष में मताधिकार के अपने अधिकार का सही ढंग से उपयोग करने में मदद मिल सके। चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 यह स्पष्ट करता है कि चुनाव चिह्न का उपयोग करने का अधिकार पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के साथ खो सकता है।
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