
नई दिल्ली(New Delh). सुप्रीम कोर्ट से बिलकिस बानो को तगड़ा झटका लगा है। SC ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने साथ हुए रेप के 11 दोषियों की जल्द रिहाई का विरोध किया था। बिलकिस ने उस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की थी, जिसके तहत दोषियों की सजा माफ की गई थी। 15 अगस्त को गुजरात सरकार ने अपने 1992 के जेल नियमों के तहत 11 दोषियों को समय से पहले रिहा कर दिया था। इसे लेकर कई संगठनों ने नाराजगी भी बयां की थी। यह है पूरा मामला...
2002 के गुजरात दंगों के दौरान बानो के साथ गैंग रेप किया गया था और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। जस्टिस अजय रस्तोगी और विक्रम नाथ की बेंच के समक्ष 13 दिसंबर को विचार के लिए समीक्षा याचिका(review pleas) आई थी। सुप्रीम कोर्ट के सहायक रजिस्ट्रार द्वारा बानो की वकील शोभा गुप्ता को भेजे गए एक कम्यूनिकेशन में कहा गया-"मुझे आपको सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई समीक्षा याचिका को अदालत ने 13 दिसंबर, 2022 को खारिज कर दिया था।"
गैंगरेप पीड़िता ने एक दोषी द्वारा दायर याचिका पर शीर्ष अदालत के 13 मई के आदेश की समीक्षा की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से नौ जुलाई, 1992 की अपनी नीति के तहत दोषियों की समय से पहले रिहाई की याचिका पर दो महीने के भीतर विचार करने को कहा था। सभी 11 दोषियों को गुजरात सरकार ने छूट दी और 15 अगस्त को रिहा कर दिया था।
इससे पहले बिलकिस बानो की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। हालांकि कोर्ट ने नई बेंच गठित करने से इनकार किया था। सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि बार-बार एक ही बात का उल्लेख न करें। यह बहुत परेशान करने वाला है। सीजेआई (Chief Justice of India) डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने बुधवार को सुनवाई करते हुए नई बेंच गठित करने की मांग पर यह कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। बिल्किस बानो के वकील ने इस मामले की सुनवाई कर रहे जजों की बेंच में से एक जस्टिस बेला त्रिवेदी के बेंच से मंगलवार को बाहर निकलने के बाद उन्हें एक नई पीठ स्थापित करने पर विचार करने के लिए कहा था। इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि याचिका सूचीबद्ध किया जाएगा। कृपया बार-बार एक ही बात का उल्लेख न करें। यह बहुत परेशान करने वाला है। क्लिक करके पढ़ें
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में गुजरात सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि रिहा हुए सभी दोषियों को पक्ष बनाया जाए। हम देखेंगे कि वे माफी के हकदार हैं या नहीं। क्लिक करके पढ़ें पूरी डिटेल्स
2002 में गुजरात में गोधरा कांड के बाद दंगे हुए थे। इस दौरान लीमखेड़ा तहसील में बिल्किस बानो के साथ आरोपियों ने गैंगरेप किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना के समय बिल्किस बानो गर्भवती थी। गैंगरेप के बाद उसकी फैमली के सात सदस्यों को मार दिया गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद कोर्ट ने 2008 में मामले में सुनवाई करते हुए आरोपियों को दोषी पाया था और अजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अलग-अलग जेल में रहने के बाद आरोपियों को गोधरा की उपजेल में रखा गया था।
आरोपियों के द्वारा 15 साल की सजा काटने के बाद सुप्रीम कोर्ट में रिहाई के लिए याचिका लगाई गई थी। कोर्ट ने इनकी याचिका पर सुनवाई के बाद रिहाई के लिए मंजूरी दे दी थी। कोर्ट से स्वीकृति मिलने के बाद राज्य सरकार की माफी योजना के तहत इन्हें रिहा कर दिया गया।
जिन 11 आरोपियों को जेल से छोड़ा गया है उनमें जसवंतभाई नई, गोविंदभाई नई, शैलेश भट्ट, राधेशम शाह, बिपिन चंद्र जोशी, केसरभाई वोहानिया, प्रदीप मोर्धिया, बकाभाई वोहानिया, राजूभाई सोनी, मितेश भट्ट और रमेश चंदना शामिल हैं।
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