
Shubhanshu Shukla: भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने रविवार को अपने बचपन और सफर की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि वह बचपन में बहुत शर्मीले और संकोची स्वभाव के थे। राकेश शर्मा की 1984 की अंतरिक्ष यात्रा की कहानियां सुनते हुए वह बड़े हुए और उसी से उन्हें प्रेरणा मिली।
लखनऊ में जन्मे 40 वर्षीय शुभांशु शुक्ला साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। उनका परिवार सेना से जुड़ा नहीं था, लेकिन संयोग से भरे एक फॉर्म ने उनकी जिंदगी बदल दी और वे एनडीए पहुंच गए। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना उनके जीवन की सबसे बड़ी शिक्षक रही। कॉकपिट और प्रशिक्षण ने उन्हें चुनौतियों से लड़ना और सफलता की राह पर चलना सिखाया।
शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की 20 दिन की यात्रा पूरी की। इस दौरान उन्होंने सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण की चुनौतियों, अंतरिक्ष से दिखने वाले खूबसूरत नज़रों और हर दिन 16 सूर्योदय व 16 सूर्यास्त देखने के अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी का रात का नजारा सबसे सुंदर था।
दिल्ली के सुब्रतो पार्क स्थित वायुसेना सभागार में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुभांशु शुक्ला और गगनयान मिशन के लिए चुने गए तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को सम्मानित किया। मंच पर मौजूद हर कोई उनसे मिलने और सुनने के लिए उत्साहित था।
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शुभांशु शुक्ला ने कहा कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गगनयान और भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष केंद्र जैसी योजनाओं से देश को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने युवाओं से कहा, “जिज्ञासु बने रहें, सपने बड़े रखें और मेहनत से उन्हें पूरा करें। अंतरिक्ष में संभावनाएं अनंत हैं।”
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