
नई दिल्ली। अयोध्या में बने राम मंदिर (Ram Mandir) का उद्घाटन 22 जनवरी को होने वाला है। मंदिर निर्माण का रास्ता चार साल पहले सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद खुला था। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसके बाद राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण हो सका। फैसला सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था। इस पीठ में भारत के वर्तमान CJI (Chief Justice of India) डीवाई चंद्रचूड़ भी थे।
फैसला सुनाए जाने के चार साल से भी अधिक समय बाद सोमवार को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मालिकाना हक मामले का फैसला 'सर्वसम्मति से' क्यों सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को फैसला सुनया था। इसके बाद अयोध्या विवाद का समाधान हुआ। तत्कालीन CJI रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने न केवल विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण की सुविधा दी, बल्कि यह भी निर्देश दिया कि अयोध्या शहर के भीतर एक मस्जिद के निर्माण के लिए अलग से पांच एकड़ जमीन आवंटित की जाए।
पांच जजों की पीठ ने तय किया था फैसला कोर्ट का होगा
जस्टिस चंद्रचूड़ ने निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जज फैसले को किसी व्यक्ति विशेष के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय कोर्ट की एक आवाज के रूप में पेश करने पर आम सहमति पर पहुंचे थे। CJI ने कहा, "जब पांच जजों की पीठ फैसले पर विचार करने बैठी तो हमने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यह अदालत का फैसला होगा। इसलिए इसमें किसी भी व्यक्तिगत जज को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।"
चंद्रचूड़ ने कहा, "इस मामले को लेकर संघर्ष का लंबा इतिहास था। पीठ में शामिल जजों ने तय किया था कि फैसला पूरे कोर्ट का होगा। कोर्ट एक स्वर से बात करेगी। ऐसा यह संदेश देने के लिए किया गया कि हम सभी फैसले के साथ खड़े हैं।"
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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ के 2019 के फैसले ने हिंदुओं की निर्विवाद मान्यता को स्वीकार किया कि भगवान राम का जन्म विवादित स्थल पर हुआ था। इससे हिंदू पक्ष को भूमि के प्रतीकात्मक मालिक के रूप में मान्यता मिली और मंदिर निर्माण का रास्ता खुला। कोर्ट ने यह भी कहा कि हिंदू कार्यकर्ताओं द्वारा बाबरी मस्जिद का विध्वंस एक ऐसा कृत्य था जिसमें सुधार की आवश्यकता थी।
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