
Puja Khedkar: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर को अग्रिम जमानत दे दी। पूजा 2022 की सिविल सेवा प्रवेश परीक्षा के लिए पात्रता हासिल करने के लिए दस्तावेजों में जालसाजी करने और ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर कोटे का दुरुपयोग करने की आरोपी है।
खेडकर को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह कोई ड्रग माफिया या आतंकवादी नही है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रही है। इसपर कोर्ट ने कहा, "वह NDPS अपराधी नहीं है। आपके पास एक सिस्टम या सॉफ्टवेयर होना चाहिए। आप जांच पूरी करें। उसने सब कुछ खो दिया है। उसे कहीं नौकरी नहीं मिलेगी।"
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट को याचिकाकर्ता (पूजा खेडकर) को जमानत दे देनी चाहिए थी। खेडकर के खिलाफ संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा देते समय अपने परिवार की आमदनी की स्थिति और अन्य जानकारी गलत तरीके से देने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।
UPSC ने पूजा खेडकर द्वारा दिए गए दस्तावेजों की जांच की तो वे फर्जी निकलीं। इसके बाद उसके सेलेक्शन को रद्द कर दिया गया था। UPSC ने पूजा खेडकर पर आजीवन सिविल सेवा प्रवेश परीक्षा में शामिल होने से बैन लगा दिया है। मामला प्रकाश में आने के बाद केंद्र सरकार ने उसे सभी दायित्व से मुक्त कर दिया था।
बता दें कि पूजा खेडकर जून 2024 में विवादों में आई थी। उसने कार, स्टाफ और ऑफिस मुहैया कराने की मांग की थी। विवाद के बाद खेडकर का तबादला वाशिम कर दिया गया था। इसके बाद खेडकर की चयन प्रक्रिया जांच के दायरे में आ गई। पता चला कि उसने ओबीसी और विकलांग व्यक्तियों के कोटे के तहत छूट पाने के लिए जाली दस्तावेज लगाए थे। खेडकर के पिता महाराष्ट्र सरकार के पूर्व अधिकारी थे। उनके पास 40 करोड़ रुपए की संपत्ति थी। इससे पूजा खेडकर ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर के लिए अयोग्य हो गई थी।
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