माई लार्ड कहना बंद करें, मैं आपको आधी सैलरी दे दूंगा...सुप्रीम कोर्ट के जज ने क्यों कही इतनी बड़ी बात

Published : Nov 03, 2023, 12:08 AM ISTUpdated : Nov 03, 2023, 09:56 AM IST
supreme court

सार

सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक कार्यवाही के दौरान वकील अमूमन जजों को योर लार्डशिप या माई लार्ड कहकर संबोधित करते हैं।

Judges addresed as My Lord: अदालतों में जजों को माई लार्ड या योर लार्डशिप का संबोधन आम बात है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक जज बुधवार को जिरह के दौरान वकीलों द्वारा माई लार्ड और योर लार्डशिप कहे जाने पर नाखुशी जताई। बार-बार संबोधन सुनकर जज ने यहां तक कह दिया कि अगर आप मुझे योर लार्डशिप या माई लार्ड कहना छोड़ दें तो अपनी सैलरी की आधी दे दूंगा।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक कार्यवाही के दौरान वकील अमूमन जजों को योर लार्डशिप या माई लार्ड कहकर संबोधित करते हैं। एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एएस बोपन्ना के साथ बेंच के दूसरे सीनियर जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने एक सीनियर से कहा, "आप कितनी बार 'माई लॉर्ड्स' कहेंगे? यदि आप यह कहना बंद कर देंगे, तो मैं आपको अपना आधा वेतन दे दूंगा।"

जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि आप इसके बजाय 'सर' का उपयोग क्यों नहीं करते। अन्यथा वह गिनना शुरू कर देंगे कि वरिष्ठ वकील ने कितनी बार "माई लॉर्ड्स" शब्द का उच्चारण किया।

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बहस या जिरह के दौरान अमूमन यह संबोधन होता

वकील बहस के दौरान जजों को हमेशा "माई लॉर्ड" या "योर लॉर्डशिप" कहकर संबोधित करते हैं। यह औपनिवेशिक युग की प्रथा है और इस इस प्रथा का विरोध करने वाले अक्सर इसे औपनिवेशिक युग का अवशेष और गुलामी की निशानी कहते हैं।

इन शब्दों के इस्तेमाल नहीं करने पर पूर्व में प्रस्ताव

2006 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें निर्णय लिया गया था कि कोई भी वकील न्यायाधीशों को माई लॉर्ड और योर लॉर्डशिप कहकर संबोधित नहीं करेगा। हालांकि, प्रस्ताव पास होने के 17 साल बाद भी इसे व्यवहार में नहीं लाया जा सका है।

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