
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मुसलमानों में बहु विवाह (Polygamy) और निकाल हलाला (Nikah Halala) की संवैधानिक वैधता को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NMC) से जवाब मांगा है। कोर्ट मंगलवार को बहुविवाह और 'निकाह हलाला' की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था। तीनों आयोगों को जस्टिस इंदिरा बनर्जी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने नोटिस जारी किया है। दशहरा की छुट्टियों के बाद मामले में फिर से सुनवाई शुरू होगी।
कौन-कौन है संविधान पीठ में?
मुसलमानों के बीच बहु विवाद और 'निकाह हलाला' की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता जस्टिस इंदिरा बनर्जी कर रही हैं। जबकि न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया इसकी जूरी में हैं।
याचिकाकर्ता ने की है यह मांग?
याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान पेश हुए। याचिकाकर्ता उपाध्याय ने मुसलमानों के बीच बहुविवाह और निकाह हलाला को असंवैधानिक और अवैध घोषित करने का निर्देश देने की मांग की है। एपेक्स कोर्ट ने जुलाई 2018 में याचिका पर विचार किया था। पहले से ही इसी तरह की याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई करने वाली संविधान पीठ को सौंप दिया था। दरअसल, अदालत ने फरजाना नाम की महिला द्वारा दायर याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था और उपाध्याय की याचिका को संविधान पीठ द्वारा सुनवाई के लिए याचिकाओं के एक बैच के साथ टैग किया था।
क्या है निकाह हलाला और बहु विवाह?
मुस्लिमों में निकाल हलाला और बहु विवाह वैध है। बहु विवाह के अंतर्गत मुस्लिम पुरुष चार निकाह कर सकता है और यह वैध होगा। निकाह हलाला के अनुसार किसी भी महिला को तलाक के बाद अगर फिर से उसे उसका पति अपनाता है तो उस महिला को पहले किसी अन्य पुरुष के साथ निकाह करना होगा और फिर तलाक लेना होता है।
सुप्रीम कोर्ट में निकाह हलाला व बहु विवाह के खिलाफ कई याचिकाएं
सुप्रीम कोर्ट में निकाह हलाला और बहु विवाह के खिलाफ कई याचिकाएं डाली गई हैं। कई मुस्लिम महिलाओं ने इन दोनों प्रथाओं को असंवैधानिक घोषित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कई याचिकाओं के बाद कोर्ट ने इस मामले को संविधान पीठ को सौंप दी थी।
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