Ahmedabad Air India Crash: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, जांच के डेटा का पूरा खुलासा करने की मांग

Vivek Kumar   | ANI
Published : Sep 19, 2025, 10:54 PM IST
Air India Crash in Ahmedabad

सार

Air India Crash: 12 जून 2025 को अहमदाबाद में एयर इंडिया बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गया था। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हुई। इस मामले में एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है।

Air India Ahmedabad Crash: सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इसमें केंद्र को 12 जून 2025 को अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर से मिले पूरे डेटा का खुलासा करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इस घातक हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी।

याचिका में विमान हादसे की शुरुआती रिपोर्ट पर उठाए गए सवाल

एनजीओ सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन की तरफ से दायर याचिका में नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा हवाई दुर्घटना पर जारी की गई शुरुआती रिपोर्ट पर कुछ सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि रिपोर्ट हवाई दुर्घटना जांच के शुरुआती चरण में मिले सभी डेटा को जारी करने में नाकाम रही है। विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम, 2017 के तहत यह जरूरी है। इसलिए, इसमें दुर्घटना से जुड़े सभी बुनियादी तथ्यात्मक डेटा का पूरा खुलासा करने की मांग की गई है।

कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर समेत सभी रिपोर्ट करें सार्वजनिक 

याचिका में प्रार्थना की गई है, "उत्तरदाताओं को निर्देश दिया जाए कि वे दुर्घटना से जुड़े सभी बुनियादी तथ्यात्मक डेटा को तुरंत सार्वजनिक करें और इस माननीय न्यायालय को उपलब्ध कराएं। इसमें बिना किसी सीमा के, पूरा डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) आउटपुट, टाइमस्टैम्प के साथ पूरा कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) ट्रांसक्रिप्ट, और संबंधित विमान से जुड़े सभी रिकॉर्ड किए गए फॉल्ट मैसेज और तकनीकी सलाह शामिल हैं।"
 

इसके अलावा, याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि शुरुआती रिपोर्ट में एकमात्र जीवित बचे यात्री, लीसेस्टर के 40 वर्षीय व्यवसायी विश्वासकुमार रमेश की गवाही को शामिल करने या उसे स्वीकार करने में भी नाकाम रही है। इसके अलावा, याचिका में जोर देकर कहा गया है कि यह मामला सिर्फ एक अकेली दुर्घटना की जांच से नहीं, बल्कि भारत में नागरिक उड्डयन की सुरक्षा में जनता के विश्वास को बनाए रखने से जुड़ा है।

इसमें आगे कहा गया है, “जब एक ही विनाशकारी घटना में सैकड़ों जानें चली जाती हैं, तो देश न केवल मृतकों का शोक मनाता है, बल्कि जांच प्रक्रिया को सच्चाई, जवाबदेही और इस भरोसे के स्रोत के रूप में भी देखता है कि ऐसी आपदा दोबारा नहीं होगी। इसलिए, दांव पर सिर्फ पीड़ितों के परिवार ही नहीं, बल्कि हर वो नागरिक है जो परिवहन के साधन के रूप में विमानन पर निर्भर है।”

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याचिका में यह भी बताया गया है कि ऐसी परिस्थितियों में, एक व्यापक जांच की जरूरत को कम नहीं आंका जा सकता, क्योंकि यह अनुच्छेद 21 के तहत जीवन, सम्मान और सुरक्षा के अधिकार और यात्रा करने वाली जनता के उन संस्थानों में विश्वास को प्रभावित करता है, जो उनकी रक्षा के लिए बने हैं।

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