
नई दिल्ली। युवा तुर्क कहे जाने वाले चंद्रशेखर का प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल भले ही छोटा रहा हो लेकिन उनके काम करने का ढंग हमेशा ही याद रखा जाएगा। राजनैतिक जीवन में पीएम के अतिरिक्त किसी भी अन्य पद से समझौता नहीं करने वाले इस राजनेता से पाकिस्तान भी कायल था। कश्मीर पर हमेशा बेसुरा राग अलापने वाले पाकिस्तानी हुक्मरानों को चंद्रशेखर ने भरी महफिल में पानी पानी कर दिया था।
‘कश्मीर आपको दिया’ लेकिन...
साल 1991 में वीपी सिंह की जनता दल सरकार गिरने के बाद चंद्रशेखर कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बनें। इसी बीच मालदीव में राष्ट्रमंडल देशों का शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। भारत के प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी शामिल हुए।
यह वह वक्त था जब पाकिस्तान कश्मीर को लेकर लगातार बड़बोले बयान दे रहा था, आतंकी गतिविधियां भी किसी से छुपी नहीं थी।
सम्मेलन हुआ राष्ट्राध्यक्ष अपना अपना भाषण दे रहे थे। पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ ने भाषण दिया। भारत के प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी भाषण दिए।
मंच से उतरते ही नवाज शरीफ से बोले-भाईजान बहुत बदमाशी कर रहे
सम्मेलन समाप्त होने पर जैसे ही चंद्रशेखर मंच से उतरे तो उनके सामने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ दिख गए। नवाज चंद्रशेखर की ओर ही बढ़े आ रहे थे। जैसे ही नवाज पास पहुंचे बिना किसी औपचारिकता के चंद्रशेखर उनके कंधे पर हाथ रखकर हालचाल पूछे। कंधे पर हाथ रखे रखे ही चंद्रशेखर ने कहा कि आप बहुत बदमाशी करते हैं।
नवाज को मौका मिल गया। उन्होंने तपाक से कहा, आप बदमाशी का कारण दूर कर दीजिए। चंद्रशेखर ठहरे युवा तुर्क। तत्काल कह दिया कि आप बताइए तुरंत बदमाशी का कारण दूर कर देता हूं।
नवाज ने कहा-कश्मीर हमें दे दीजिए
इस पर नवाज शरीफ ने कहा तो कश्मीर हमें दे दीजिए, बदमाशी दूर हो जाएगी। चंद्रशेखर नवाज की ओर देखे और बोल दिए-कश्मीर आपको दिया। सब अवाक। नवाज के चेहरे पर विजयी मुस्कान छा गई। बोले-कैसे आगे बढ़ना है, चलिए बात कर लें।
चंद्रशेखर बेफिक्र होकर एक कमरे में गए। वहां चंद्रशेखर ने कहा कि आपको एक छोटी सा ऐलान करना होगा। नवाज शरीफ विजयी मुद्रा में बोले कहिए क्या करना है, अभी कर देता हूं। चंद्रशेखर बोले-कश्मीर के साथ आपको 15 करोड़ मुसलमानों को भी लेना होगा।
तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की यह बातें सुनते ही नवाज शरीफ के मुंह पर मानों तमाचा लगा हो। चेहरा पलभर में ही मानों काला पड़ गया हो।
अब नवाज फंसते नजर आ रहे थे। बोले-इसका क्या मतलब हुआ। फिर चंद्रशेखर ने कहा कि कश्मीर तो आपको दे देंगे लेकिन पूरे देशभर में 15 करोड़ मुसलमान भी रहते हैं। अधिकतर हमारें गांवों में हैं। फिर उनको अल्पसंख्यक बताकर निकालने की बात होने लगेगी। दंगा भड़केगा और मेरे पास इतनी पुलिस नहीं कि दंगों को रोक सकूं। कश्मीर हमारे पास है तो वह भारत के अन्य मुसलमानों की सुरक्षा की गारंटी भी है। आप अगर ऐलान कर दे ंतो मैं तुरंत कश्मीर आपको दिया।
नवाज समझ चुके थे कि किससे कश्मीर मांग लिया। उन्होंने तत्काल चंद्रशेखर से पूछा कि मैं आपको भाई साहब कह सकता हूं। चंद्रशेखर मुस्कुराए और कहा जरूर। फिर माहौल थोड़ा हल्का हुआ। नवाज मुस्कुराते हुए बोले-भाई साहब मैं भी चुप हो जाता हूं और आप भी चुप हो जाइए। बात यहीं खत्म करते हैं।
आज पूरा देश मना रहा पुण्यतिथि
बलिया के इब्राहिम पट्टी गांव से देश की क्षितिज पर चकमने वाले युवा तुर्क के नाम से विख्यात चंद्रशेखर का जन्म 17 अप्रैल 1927 में हुआ था। छात्र राजनीति से निकले चंद्रशेखर का निधन 8 जुलाई 2007 को हुआ था। 1962 मंें पहली बार लोकसभा सदस्य बनें।
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