जम्मू-कश्मीर: पीढ़ियों से इस बगिया को संजोते रहे, उनके खून से जन्नत लहूलुहान, बूढ़ी मां का विलाप रूह चीर दे

Published : Oct 07, 2021, 07:59 PM ISTUpdated : Oct 07, 2021, 10:05 PM IST
जम्मू-कश्मीर: पीढ़ियों से इस बगिया को संजोते रहे, उनके खून से जन्नत लहूलुहान, बूढ़ी मां का विलाप रूह चीर दे

सार

घाटी में पिछले पांच दिनों में सातवीं घटना है। आतंकी सात परिवारों को उजाड़ चुके हैं। इनमें से आधा दर्जन वारदात तो श्रीनगर का ही है। आंकड़ों पर अगर गौर करें तो इस साल 2021 में पूरे कश्मीर में आतंकी हमलों में 28 नागरिकों को शिकार बनाया गया है। 

श्रीनगर। करीब तीन दशक पहले जब जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में आतंकवाद (Terrorism) चरम पर था और घाटी बम धमाकों से लहूलुहान रहती थी तो कुछ ऐसे परिवार थे जिन्होंने अपनी माटी को नहीं छोड़ने का निर्णय लिया। हजारों मुश्किलों, दहशतगर्दी को झेलते हुए कश्मीर को जन्नत बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

लेकिन अब वे हारते नजर आ रहे, उनके हौसले एक बार फिर, जहन्नुम बन रहे कश्मीर को, जन्नत बनाने की कोशिशें करने से इनकार कर रहे। अपनों की खून से लाल हो रही घाटी अब उनसे देखी नहीं जा रही है। वे समझ नहीं पा रहे कि जीवन का अमूल्य समय और कई पीढ़ियों की यादें जहां संजो कर रखी है, उस पर अब क्या फैसला करें? सुरक्षा बलों पर उनके यकीं, दहशतगर्दों की दुस्साहस के आगे मद्धिम पड़ती दिख रही। 

दरअसल, जम्मू-कश्मीर को एक बार फिर से अस्थिर करने की आतंकियों की कोशिशें शुरू हो गई है। केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद इन दिनों आतंकी लगातार खून-खराबा करने पर उतारू हैं। पिछले पांच दिनों में यह आम नागरिकों पर आतंकियों का सातवां हमला है। हर हमले में आतंकियों ने खूनखराबा कर डराने की कोशिशें की है। 

कश्मीर जन्नत नहीं जहन्नुम है! 

जम्मू-कश्मीर के शिक्षक दीपक चांद को स्कूल में दहशतगर्दों ने निर्मम हत्या कर दी। परिवार पीढ़ियों से यहां रह रहा है। लेकिन कभी इस धरती को जन्नत मानने वाला चांद का परिवार अब गम-ओ-गुस्सा निकाल रहा। परिवार वाले रोते-बिलखते कह रहे कि कश्मीर जन्नत नहीं है, हमारे परिवार के लिए तो यह जहन्नुम है। परिजन दीपक चांद की नन्हीं बच्ची को लेकर चिंतित हैं। पूरा परिवार खौफ में जी रहा है। इनके परिवारीजन बताते हैं कि आतंकियों के धमकी भरे फोन अभी भी आ रहे हैं। तीस सालों से वे लोग आतंकियों के निशाने पर हैं। 

बूढ़ी आंखें बस इतना कह पा रही- मुझे मार देते बेटी को बख्श देते

आतंकियों की गोली के शिकार शिक्षकों में प्रिंसिपल सुपिंदर कौर भी हैं। बूढ़ी मां को जैसे ही यह सूचना मिली उनको आतंकियों ने मार दिया है तो वह बदहवास हो गईं। जार-जार रो रही मां इतना की कह रहीं थीं कि मुझे गोली मार दो, उसे क्यों मार दिया? मुझ बूढ़ी को गोली मारो। महिलाएं उनको संभालते हुए अपने आंसू न रोक पा रहीं थी। 

 

दहशत में जम्मू-कश्मीर

घाटी में पिछले पांच दिनों में सातवीं घटना है। आतंकी सात परिवारों को उजाड़ चुके हैं। इनमें से आधा दर्जन वारदात तो श्रीनगर का ही है। आंकड़ों पर अगर गौर करें तो इस साल 2021 में पूरे कश्मीर में आतंकी हमलों में 28 नागरिकों को शिकार बनाया गया है। इनमें श्रीनगर में 10, पुलवामा में 4, अनंतनाग में 4, कुलगाम में 3, बारामूला में 2, बडगाम में एक और बांदीपोरा में हत्या की गई है। आतंकी वारदातों से पूरे राज्य में दहशत का माहौल है।

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