
अहमदाबाद. गुजरात के सूरत में तीन केस ऐसे मिले, जिसमें कोरोना वैक्सीन लगवाए बिना ही सर्टिफिकेट मिल गया। सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, जो भी व्यक्ति वैक्सीन लगवाता है उसे एक सर्टिफिकेट मिलता है। सूरत में मिले केस के बाद अधिकारियों ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया।
"13 मार्च को वैक्सीन लगनी थी, लेकिन गए नहीं"
पांडेसरा इलाके के निवासी अनूप सिंह ने कहा कि उनके पिता हरभान सिंह (62) का कोविड -19 वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट मिला था, लेकिन उन्हें अभी तक वैक्सीन की एक खुराक तक नहीं मिली थी।
अनूप सिंह ने कहा, पिछले बुधवार को पिता को वैक्सीन लगवाने के लिए 13 मार्च का दिन तय किया गया। मुझे बारमोली शहरी स्वास्थ्य केंद्र में जाना था, जहां पिता जी को कोरोना की वैक्सीन लगती। लेकिन शहर से बाहर होने की वजह से मेरे पिता जी वैक्सीन लगवाने नहीं जा सके। इसके बाद भी उन्हें कोरोना का सर्टिफिकेट मिल गया।
ऐसे ही दो और केस मिले हैं, जिसमें गड़बड़ी है
ऐसे ही दो और केस मिले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये भी 13 मार्च को कोरोना की वैक्सीन लेने वाले थे, लेकिन किसी कारण वैक्सीन नहीं लगवा सके। लेकिन उन्हें कोरोना वैक्सीन लगवाने का सर्टिफिकेट मिल गया।
पूरे मामले पर डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर (हेल्थ) डॉक्टर आशीष नाइक ने कहा, हम आईटी विभाग के साथ इस मामले पर चर्चा कर रहे हैं और इसे सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, हमारे आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इन लाभार्थियों को वैक्सीन नहीं लगाई गई है, लेकिन फिर भी उन्हें सर्टिफिकेट मिला है। इसका मतलब है कि कुछ तकनीकी गड़बड़ है, जिसे हम ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं।
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