
मंदी। इस वक्त दुनिया के दो प्रमुख विकसित देश जापान और यूके मंदी के दौर में प्रवेश कर चुकी है। कोविड के बाद से दोनों देशों में मंदी के दौर की शुरुआत हुई। इसी बीच UK ने जानकारी दी कि 2023 की चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था में 0।3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके साथ ही यूके आधिकारिक तौर पर मंदी में प्रवेश कर गया। वहीं जापान जो कभी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर था, आज मंदी का दंश झेल रहा है।
जापान, यूके समेत दुनिया के कई देश कोविड के बाद से अपनी गिरती अर्थव्यवस्था से काफी परेशान है। इसमें दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कहे जाना वाला देश चीन भी शामिल है। हालांकि, वहां अभी मंदी नहीं आई है लेकिन कोविड की वजह से इकोनॉमी पर काफी चोट पहुंचा है। हालांकि, भारत ने कोविड के बाद भी अपनी इकोनॉमी पर कंट्रोल बनाए रखा और इसका सबूत ये है कि भारत की इकोनॉमी कोविड के बाद से हाल के वर्षों में 7 फीसदी की तेजी से बढ़ी है।
दुनिया के सामने भारत ने दिखाई ताकत
एक तरफ जहां दुनिया के बड़े देश गिरती अर्थव्यवस्था से परेशान, वहीं भारत मजबूती से खड़ा है। वैश्विक स्तर पर इसका फायदा भारत को हो सकता है। क्योंकि भारत एक ऐसा देश है, जिसकी जनसंख्या आज के वक्त में सबसे ज्यादा है और ये इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है। ये दुनिया के लिए सबसे बड़ा ग्लोबल मार्केट है। इस वजह से भारत अब वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनने के अवसर का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है।
इसका सबूत बीते साल देखने को भी मिला, जब एपल जैसी कई बड़ी कंपनियां चीन के बजाए भारत में अपना मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का विस्तार किया और पहली बार मेड इन इंडिया एप्पल लॉन्च किया गया। इसके अलावा भारत ने मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी निर्मित सामानों पर अपनी निर्भरता दिखाई है। हाल ही में भारत ने देश में बने तेजस फाइटर जेट बनाया और INS विक्रांत जैसे पोत बनाकर दुनिया के सामने अपनी ताकत दिखाई।
विश्व आर्थिक स्थिति की रिपोर्ट
विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएं 2024 रिपोर्ट के अनुसार, भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है और 2024 में इसकी वृद्धि 6.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। भारत वर्तमान में अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी के बाद दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 2023 में अमेरिका का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 27.94 ट्रिलियन डॉलर था, जबकि चीन का 17.5 ट्रिलियन डॉलर था।
भारत की जीडीपी लगभग 3.7 ट्रिलियन डॉलर है लेकिन लगभग 7% की तेज दर से बढ़ रही है। भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बढ़ती रुचि से लाभान्वित हो रहा है, जो विकसित अर्थव्यवस्थाओं की आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण नीतियों के संदर्भ में देश को एक प्रमुख वैकल्पिक विनिर्माण आधार के रूप में देखते हैं।
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