फ्रांसीसी पत्रकार वैनेसा डौगनैक ने भारत छोड़ने को लेकर कहा कि उन्हें भारत छोड़ना उनकी पसंद नहीं था। उन्हें सरकार द्वारा मजबूर किया गया था।

वैनेसा डौगनैक। फ्रांसीसी पत्रकार वैनेसा डौगनैक ने शनिवार (17 फरवरी) को भारत छोड़ दिया। उन्होंने वजह बताते हुए कहा कि उनके प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड को रद्द कर दिया गया है। इसके संबंध में वो सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिस के मद्देनजर शुरू की गई कानूनी प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार नहीं कर सकतीं। उन्होंने एक बयान में कहा,"आज मैं भारत छोड़ रही हूं। ये वो देश है, जहां मैं 25 साल पहले एक छात्र के रूप में आयी थी। मैंने एक पत्रकार के रूप में 23 साल तक काम किया है। मैंने शादी की और अपने बेटे का पालन-पोषण किया। इसे मैं अपना घर कहती हूं।"

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बता दें कि वैनेसा डौगनैक फ्रांसीसी अखबार ला क्रॉइक्स और ले प्वाइंट स्विस अखबार ले टेम्प्स और बेल्जियम अखबार ले सोइर के दक्षिण एशिया संवाददाता है. उन्हें पिछले महीने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय ने डौग्नैक को एक नोटिस भेजकर पूछा था कि उसका Overseas Citizen of India (OCI) कार्ड क्यों रद्द नहीं किया जाना चाहिए? उन्हें कहा गया कि वो नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत जारी नियमों के अनुमति के बिना पत्रकारिता गतिविधियां कर रही थी"।

फ्रांस भारत के फैसले की कर रहा सराहना

फ्रांसीसी पत्रकार वैनेसा डौगनैक ने भारत छोड़ने को लेकर कहा कि उन्हें भारत छोड़ना उनकी पसंद नहीं था। उन्हें सरकार द्वारा मजबूर किया गया था। उन्होंने दावा किया कि शायद उनके लेख भारत की संप्रभुता और अखंडता के हितों" को नुकसान पहुंचा रहे थे। डौगनैक से जुड़े नोटिस का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में भी उठा, जो गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे। इस संबंध में 26 जनवरी को देश सचिव विनय क्वात्रा ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि फ्रांस मामले को पूरी तरह से नियमों के पहलू से देखता है। वो इसके लिए भारत की सराहना करता है।

उन्होंने कहा कि लोग किसी दिए गए स्थान पर वह करने के लिए स्वतंत्र हैं, जो करने के लिए उन्हें मान्यता दी गई है। लेकिन यहां मुझे लगता है कि मुख्य मुद्दा यह है कि क्या व्यक्ति उस राज्य के नियमों और विनियमों का अनुपालन कर रहा है जिसके तहत वे आते हैं।

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