
नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न्यूज एजेंसी ANI से 2023 में राज्यों के चुनाव, अडानी-हिंडनबर्ग मामला, PFI प्रतिबंध, संसद व्यवधान, आंतरिक सुरक्षा और 2024 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव और अन्य मुद्दों पर बेबाक बातचीत की। उन्होंने साफ कहा कि संसद की कार्यवाही एक्सपंज(Expunge) वाक्यों से भरी पड़ी है। संसद में नियमों के हिसाब से बहस करनी होती है। पढ़िए और क्या बोले अमित शाह...
त्रिपुरा चुनाव: हमने 'चलो पलटाई' का नारा त्रिपुरा की स्थिति बदलने के लिए दिया था और आज हमने स्थिति को बदला है...हमने बजट अच्छा किया है। हमने हिंसा को समाप्त किया है। नशे के कारोबार पर कठोरता से नकेल कसी है।
PFI पर बैन: PFI कैडर पर कई मामले थे। उन्हें समाप्त करने का काम कांग्रेस ने किया, जिसे कोर्ट ने रोका...हमने PFI को सफलतापूर्वक बैन किया। PFI देश में धर्मांधता और कट्टरता बढ़ाने वाला संगठन था। आतंकवाद का एक प्रकार से सामग्री तैयार करने का काम वे लोग कर रहे थे।
PM मोदी: PM मोदी ने उत्तर-पूर्व और भारत के बाकी के हिस्सों के बीच जो मन की दूरी थी उसे समाप्त कर दिया है।आज उत्तर-पूर्व के लोगों को मन से लगता है कि बाकी हिस्सों में हमारा सम्मान है। बाकी राज्यों से लोग उत्तर-पूर्व जाते हैं, तो वे उनका भी सम्मान करते हैं।
नक्सलवाद: बिहार और झारखंड में नक्सवादी उग्रवाद लगभग समाप्त हो चुका है। मुझे विश्वास है कि छत्तीसगढ़ में भी कुछ ही समय में शांति बहाल करने में हम सफल होंगे। जम्मू-कश्मीर में भी आतंकवाद से संबंधित सभी प्रकार के आंकड़े सबसे अच्छी स्थिति में हैं।
शहरों के नए नाम:एक भी शहर ऐसा नहीं है, जिसका पुराना नाम न हो और बदला है। इस पर बहुत सोच- समझकर हमारी सरकारों ने फैसले लिए हैं और हर सरकार का ये विधायी अधिकार है।
G-20 का नेतृत्व: अगर मोदी जी के समय में G-20 का नेतृत्व भारत को मिला है और G-20 यशस्वी तरीके से संपन्न होता है, तो इसका यश मोदी जी को मिलना ही चाहिए। क्यों न मिले?...अगर प्रोडक्ट अच्छा है, तो उसे गाजे बाजे के साथ मार्केट करना ही चाहिए।
संसद में व्यवधान: संसद में एक्सपंज(अमर्यादित टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटा देना) पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित ने कहा कि संसद की कार्यवाही एक्सपंज(Expunge) वाक्यों से भरी पड़ी है। संसद में नियमों के हिसाब से बहस करनी होती है, संसदीय भाषा में करनी होती है।
लोकसभा चुनाव: 2024 में कोई स्पर्धा नहीं है, देश एकतरफा मोदी के साथ आगे बढ़ रहा है। देश की जनता को तय करना है, अभी तक तो लोकसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी का लेबल जनता ने किसी को नहीं दिया है।
अडानी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया है। कैबिनेट का सदस्य होने के नाते इस समय इस मुद्दे पर मेरा कुछ भी बोलना सही नहीं होगा, परन्तु इसमें भाजपा के लिए कुछ छुपाने के लिए नहीं है और न ही किसी बात से डरने की जरूरत है।
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