
MEA on Adani row over US summon: अडाणी कंपनियों पर अमेरिकी इन्वेस्टर्स के पैसों का रिश्वत के लिए इस्तेमाल किए जाने के अमेरिकी समन के बाद विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा है। अडाणी मुद्दे पर संसद का शीतकालीन सत्र पिछले चार दिनों से हंगामा की भेंट चढ़ चुका है। देश में छाए इस मुद्दे पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इस मामले में बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि अडाणी ग्रुप और अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट से जुड़े कानूनी मामले पर भारत को अमेरिका से कोई समन या मैसेज नहीं मिला है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम इसे प्राइवेट फर्मों, व्यक्तियों तथा अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट से जुड़ा कानूनी मामला मानते हैं। जाहिर है, ऐसे मामलों में स्थापित प्रक्रियाएं और कानूनी रास्ते हैं जिनका हमें विश्वास है कि पालन किया जाएगा। भारत सरकार को इस मुद्दे पर पहले से सूचित नहीं किया गया था। हमने इस विशेष मामले पर अमेरिकी सरकार से कोई बातचीत भी नहीं की है।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि किसी विदेशी सरकार द्वारा समन या गिरफ्तारी वारंट की तामील के लिए कोई भी अनुरोध उनको नहीं मिला है। अगर ऐसे रिक्वेस्ट्स की योग्यता के आधार पर जांच की जाती है। हमें इस मामले में अमेरिकी पक्ष से कोई अनुरोध नहीं मिला है।
18वीं लोकसभा का पहला पहला संसद शीतकालीन सत्र काफी हंगामादार है। चार दिनों में महज 40 मिनट तक ही सत्र चल सका है। अडाणी रिश्वत कांड और संभल मस्जिद सर्वे हिंसा को लेकर विपक्ष के लगातार हंगामा के बाद सदन को 2 दिसंबर तक स्थगित कर दिया गया है। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष लगातार अडाणी और संभल मुद्दा को उठा रहा जिसको लेकर हंगामा हो रहा। संसद सत्र की पूरी खबर पढ़िए…
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