
Vice President Jagdeep Dhankhar in Jamia Millia Islamia convocation:उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को संसद में गतिरोध पर परोक्ष रूप से हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के मंदिरों में व्यवधान और गड़बड़ी को राजनीतिक रणनीति के रूप में हथियार नहीं बनाया जा सकता है। लोकतंत्र की भलाई संवाद, चर्चा और विचार-विमर्श व बहस से ही संभव है न कि गतिरोध से किसी मामले का हल हो सकता।
उपराष्ट्रपति, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के दीक्षांत में बोल रहे थे। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण है। युवाओं को खुद को सशक्त बनाने के शिक्षा पर फोकस करना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में मानव संसाधनों का सशक्तिकरण एक महत्वपूर्ण घटक है। उन्होंने छात्रों से कहा कि युवाओं को खुद को सशक्त बनाना चाहिए। राजनीतिक नशे से नहीं बल्कि स्वस्थ वातावरण और समाज के पोषण के अंतिम उद्देश्य के साथ क्षमता निर्माण और व्यक्तित्व विकास के माध्यम से किया जा सकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में इस नीति को अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि वे इसका पालन करेंगे और इस महान नीति का लाभ उठाएंगे। यह कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों, व्यावसायिक प्रशिक्षण और हमारी शैक्षिक शिक्षा को एक नया आयाम देने पर आधारित है। छात्रों के लिए इनोवेटर्स और आंतरप्रेन्योर बनना महत्वपूर्ण है।
लोकतंत्र के मंदिरों में व्यवधान
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि लोकतंत्र के मंदिरों में व्यवधान और गड़बड़ी को राजनीतिक रणनीति के रूप में हथियार नहीं बनाया जा सकता है। लोकतंत्र जनता की भलाई के लिए संवाद, चर्चा, विचार-विमर्श और बहस के बारे में है। निश्चित रूप से, लोकतंत्र व्यवधान और गड़बड़ी के बारे में नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि मुझे आपको यह बताते हुए दुख और पीड़ा हो रही है कि लोकतंत्र के मंदिरों को कलंकित करने के लिए व्यवधान और गड़बड़ी को रणनीतिक साधन के रूप में हथियार बनाया गया है।
भारत की प्रासंगिकता आज भी कायम
उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिका और फ्रांस की प्रभावशाली यात्रा पर प्रकाश डाला साथ ही कहा कि पूरी दुनिया भारत के साथ साझेदारी करने के लिए उत्सुक है। वैश्विक मुद्दों के समाधान में भारत की प्रासंगिकता कभी इतनी प्रमुख नहीं थी जितनी आज है। लेकिन दोस्तों, जब भारत बढ़ता है, जब आप अवसर का लाभ उठाते हैं तो चुनौतियां भी आती हैं। आपकी प्रगति हर किसी को पसंद नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी ताकतें हैं जिनके इरादे भयावह हैं जो आपके विकास के संस्थानों को कलंकित करना चाहते हैं। दुर्भाग्य से कुछ हमारे बीच में हैं। मैं युवा दिमागों से पहल करने और अपने कार्यों के माध्यम से इन ताकतों को बेअसर करने की अपील करता हूं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि आप ऐसा करेंगे।
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