
मुंबई। मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने शनिवार को ICICI बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को वीडियोकॉन लोन मामले में सीबीआई की हिरासत में भेज दिया। सीबीआई के अधिकारी उनसे 26 दिसंबर तक पूछताछ करेंगे।
चंदा और दीपक कोचर पर वीडियोकॉन समूह की कंपनियों को बैंक द्वारा स्वीकृत लोन के मामले में धोखाधड़ी और अनियमितताएं करने का आरोप लगा है। दोनों को सीबीआई ने पूछताछ के बाद शुक्रवार रात को गिरफ्तार किया था। CBI ने कोर्ट को बताया कि दोनों ने जांच के दौरान सहयोग नहीं किया और इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया। सीबीआई की मांग पर कोर्ट ने दोनों को तीन दिन की हिरासत में भेजा है।
आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार का लगा है आरोप
चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को सीबीआई अधिकारियों ने 2012 में आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन ग्रुप को स्वीकृत लोन में कथित धोखाधड़ी और अनियमितताओं के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर, वीडियोकॉन ग्रुप के वेणुगोपाल धूत के साथ-साथ नूपावर रिन्यूएबल्स, सुप्रीम एनर्जी, वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड को आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित आईपीसी की धाराओं के तहत दर्ज FIR में आरोपी बनाया था।
आरोप है कि वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत ने वीडियोकॉन समूह को ICICI बैंक से लोन के रूप में 3,250 करोड़ रुपए मिलने के बाद नूपावर में करोड़ों रुपए का निवेश किया। सीबीआई ने 2019 में केस दर्ज करने के बाद कहा था कि आरोपियों ने ICICI बैंक को धोखा देने के लिए साजिश के तहत प्राइवेट कंपनियों को कुछ लोन मंजूर किए थे।
चंदा कोचर पर यह है आरोप
आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व एमडी चंदा कोचर पर आरोप है कि उन्होंने बैंक नियमों को दरकिनार कर वीडियोकॉन के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत को दिया था। बैंक से धूत की कंपनी वीडियोकॉन कंपनी केा 3250 करोड़ रुपये का लोन दिया गया। यह लोन 2012 में पास किया गया था। आरोप है कि इस लोन के बदले वीडियोकॉन कंपनी के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी को लाभ पहुंचाया। एक दूसरे को लाभ पहुंचाने के क्रम में धूत ने दीपक कोचर की आल्टरनेविट इनर्जी कंपनी नूपावर में इन्वेस्ट किया।
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कैसे हुआ खुलासा?
दरअसल, वीडियोकॉन कंपनी के एक शेयरहोल्डर अरविंद गुप्ता ने पीएमओ, रिजर्व बैंक और सेबी को लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। अरविंद गुप्ता ने कोचर दंपत्ति और वीडियोकॉन कंपनी के चेयरमैन के एक दूसरे को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। इन आरोपों के बाद साल 2018 में चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ और एमडी के पद से इस्तीफा दे दिया था।
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