
Waqf Bill: वक्फ संशोधन बिल बुधवार को दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा। सरकार ने इसपर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय रखा है। सरकार समय बढ़ाने के लिए भी तैयार है। सरकार की कोशिश होगी कि इसे जल्द से जल्द लोकसभा से पास कर राज्यसभा भेजा जाए।
दूसरी ओर वक्फ बिल को लेकर विपक्ष का क्या रवैया होगा यह भी साफ हो गया है। मंगलवार को स्पीकर की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की बैठक बुलाई गई। विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। इससे साफ हो गया कि विपक्ष टकराव के मूड में है। विपक्ष और विभिन्न मुस्लिम संगठनों के विरोध के कारण बुधवार को सदन में हंगामा होने की संभावना है।
मंगलवार को वक्फ विधेयक पर बहस के लिए आवंटित समय को लेकर BAC की बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद विपक्ष ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि विपक्ष चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए वे वॉकआउट का बहाना कर रहे हैं।
वक्फ विधेयक से मुसलमानों द्वारा दान की गई करोड़ों रुपए की संपत्तियों को कंट्रोल करने वाले दशकों पुराने कानून में संशोधन का प्रस्ताव है। इसे पिछले साल अगस्त में संसद में पेश किया गया था। विपक्ष के विरोध के बीच इसे भाजपा नेता जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास परामर्श के लिए भेजा गया था। JPC द्वारा बताए गए 14 संशोधनों के साथ इस विधेयक को फरवरी में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी।
वक्फ बिल पास होता है तो वक्फ बोर्डों की संरचना में बदलाव होगा। इसमें गैर-मुस्लिमों को सदस्यों के रूप में शामिल करना अनिवार्य हो जाएगा। छह महीने के भीतर हर वक्फ संपत्ति को केंद्रीय डेटाबेस पर रजिस्टर्ड करना अनिवार्य होगा। वक्फ न्यायाधिकरण को कुछ परिस्थितियों में समय सीमा बढ़ाने का अधिकार होगा।
विवाद की स्थिति में राज्य सरकार के अधिकारी को यह तय करने का अधिकार होगा कि संपत्ति वक्फ है या सरकार की। इस प्रावधान ने बहुत विवाद पैदा किया है। मुस्लिम संगठनों का तर्क है कि अधिकारी सरकार के पक्ष में फैसला सुना सकता है।
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