
नई दिल्ली। उत्तर भारत के कुछ हिस्से इन दिनों हीटवेव की चपेट में हैं। मई के मध्य से ही अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पार कर रहा है। भारत सरकार के शीर्ष मौसम विशेषज्ञ ने कहा है कि इस साल का हीटवेव अब तक की सबसे लंबी लहर है। आगे और अधिक भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के प्रमुख मृत्युंजय महापात्रा ने इंडियन एक्सप्रेस डेली को दिए इंटरव्यू में बताया है कि भारत के कई हिस्सों में सबसे लंबा हीटवेव चल रहा है। करीब 24 दिनों से बहुत अधिक गर्मी पड़ रही है। इस महीने मानसून की बारिश के उत्तर की ओर बढ़ने से तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।
अभी और बढ़ेगी गर्मी
महापात्र ने चेतावनी दी कि इसके बाद स्थिति और भी खराब होगी। उन्होंने कहा कि हीटवेव अब अधिक और बार बार आएंगी। यह पहले से तेज और अधिक समय तक बनी रहेगी। दरअसल, गर्मी बढ़ने के लिए ग्रीनहाउस गैसों को उत्सर्जन मुख्य रूप से जिम्मेदार है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देश है। भारत ने 2070 तक नेट जीरो इमिशन इकोनॉमी बनने का लक्ष्य तय किया है। यह अधिकांश औद्योगिक पश्चिमी देशों से दो दशक बाद है। भारत अभी बिजली बनाने के लिए कोयला पर बहुत अधिक निर्भर है।
कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और क्लोरोकार्बन की बढ़ रही सांद्रता
मोहपात्रा ने कहा कि मानवीय गतिविधियों, बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिकीकरण और परिवहन तंत्र के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और क्लोरोकार्बन की सांद्रता बढ़ रही है। हम न केवल खुद को बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी खतरे में डाल रहे हैं।
वैज्ञानिक शोध से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की लहरें लंबी, अधिक लगातार और अधिक तेज हो रही हैं। नई दिल्ली में गर्मी ने पिछले रिकॉर्ड उच्च तापमान को छू लिया है। 2022 में अधिकतम तापमान 49.2C दर्ज किया गया था। गर्मी बढ़ने के चलते बिजली की मांग 8,302 मेगावाट तक पहुंच गई है।
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