मनमोहन सिंह स्मारक विवाद: समाधि निर्माण का क्या है नियम? सरकार कैसे करती फैसला

Published : Dec 28, 2024, 10:03 PM IST
Dr Manmohan Singh

सार

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खातिर दिल्ली में स्मारक के लिए भूमि आवंटन न होने पर विवाद खड़ा हो गया है। यह लेख समाधि निर्माण के नियमों और प्रक्रियाओं को लेकर है जिसमें सरकारी मंज़ूरी और भूमिका निभाने वाले विभिन्न मंत्रालयों का विवरण शामिल है।

Dr. Manmohan Singh memorial row: भारत के आर्थिक सुधारों के आर्किटेक्ट पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार शनिवार को राजकीय सम्मान के साथ दिल्ली के निगम बोध घाट पर किया गया। डॉ.सिंह की बेटी उपिंदर सिंह ने उनको मुखाग्नि दी। हालांकि, दिल्ली में स्मारक के लिए केंद्र सरकार द्वारा जमीन तत्काल अलॉट नहीं किए जाने पर राजनीति गरमा गई है। विपक्ष इसे पहले सिख प्रधानमंत्री का अनादर और सिख कौम का अपमान बताया है। डॉ.मनमोहन सिंह, देश के दो बार प्रधानमंत्री रहे हैं। देश के कई प्रधानमंत्रियों की समाधि दिल्ली में बनायी गई हैं लेकिन कई पूर्व प्रधानमंत्रियों को दिल्ली में जगह नहीं मिली। क्या आप जानते हैं कि समाधि या स्मारक बनाए जाने के क्या नियम हैं? आईए जानते हैं...

  • भारत सरकार ने समाधि या स्मारक बनाए जाने के लिए नियम निर्धारित किया है। केवल वीवीआईपी कैटेगरी के नेताओं और व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय महत्व का समाधि स्थल बनाया जा सकता है।
  • भारत सरकार यह निर्धारित करती है कि अमुक व्यक्ति ने देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है उनकी समाधि ही दिल्ली में बनायी जा सकती है। सामान्य तौर पर इस कैटेगरी में भारत के राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री, उप प्रधानमंत्री और अन्य राष्ट्रीय महत्व के व्यक्तित्व की समाधि बनाने का नियम है।
  • दिल्ली के राजघाट क्षेत्र या उसके आसपास को राष्ट्रीय स्मारक स्थल के लिए चिंहित किया गया है। यहीं समाधि स्थल बनाए जाते हैं। सरकार का मानना है कि राजघाट क्षेत्र बहुत सीमित है इसलिए चयन करने में बहुत सोच विचार किया जाता है।
  • समाधि बनाने के लिए भारत सरकार की मंजूरी जरूरी है। सरकार ही यह तय करती है कि स्मृतिशेष नेता की समाधि राजघाट क्षेत्र में बनवाया जाएगा या नहीं।
  • राजघाट और उससे जुड़े समाधि स्थलों का एडमिनिस्ट्रेशन राजघाट क्षेत्र कमेटी करती है। यह समिति संस्कृति मंत्रालय की देखरेख में कार्य करती है।
  • समाधि निर्माण प्रॉसेस में तीन मंत्रालयों का प्रमुख योगदान होता है। संस्कृति मंत्रालय द्वारा निर्माण और संरक्षण का मैनेजमेंट किया जाता है तो आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय के जिम्मे भूमि आवंटन और निर्माण योजना में सहयोग करना है। समाधि की सुरक्षा और राजकीय सम्मान की प्रक्रिया सुनिश्चित करना गृह मंत्रालय का काम होता है।

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