
Surya Gram Modhera: पिछले कुछ दिनों से गुजरात के महेसाणा जिले में स्थित मोढेरा का सूर्य ग्राम पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। पीएम मोदी ने 9 अक्टूबर, रविवार को मोढेरा में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इसी दौरान उन्होंने मोढेरा गांव को भारत का पहला 'सूर्य ग्राम' भी घोषित किया। पीएम ने उद्घाटन के दौरान कहा- मोढेरा सूर्य ग्राम बन चुका है। मोढेरा सूर्य मंदिर के लिए जाना जाता था, अब ये सौर ऊर्जा से चलने वाले गांव के तौर पर भी जाना जाएगा। आखिर क्या है सूर्य ग्राम, कैसे 24 घंटे सौर ऊर्जा से चलेगा ये गांव, जानते हैं इसका इतिहास और भी बहुत कुछ।
क्या है सूर्य ग्राम?
'सूर्य ग्राम' कहने का मतलब ऐसे गांव से है, जो पूरी तरह सौर उर्जा से संचालित होता है। महेसाणा जिले का मोढेरा गांव अब सातों दिन और चौबीसों घंटे सौर ऊर्जा से चलेगा। महेसाणा जिले से 25 किलोमीटर दूर स्थित मोढेरा गांव में सरकार ने ग्राउंड माउंटेड सोलर पावर प्लांट लगाया गया है।
गांव की हर छत पर लगे सोनर पैनल :
गांव में 24 घंटे बिजली बनाने के लिए यहां हर एक घर की छत पर 1 किलोवॉट क्षमता वाले सोलर पैनल और सोलर सिस्टम लगाए गए हैं। ये सभी सोलर सिस्टम बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) से जुड़े हुए हैं। इससे दिन में गांव और वहां के घरों को सोलर पैनल से बिजली मिलेगी, जबकि शाम को बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम घरों को बिजली की आपूर्ति होगी।
सूर्य ग्राम बनने से मोढेरा को ये फायदा :
- मोढेरा के सूर्य ग्राम बनने के बाद गांव वाले अब अपने जरूरत की बिजली उपयोग करने के बाद अतिरिक्त बिजली सरकार को बेच देंगे। इससे कमाई भी होगी।
- मोढेरा के सूर्य ग्राम बनने के बाद गांव वाले अपने बिजली बिलों में 60 से 100 फीसदी तक की बचत कर सकेंगे।
- मोढेरा में खेती बाड़ी से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग तक सभी कुछ सोलर पावर से संभव होगा।
- कुछ समय पहले, सरकार नागरिकों को बिजली की आपूर्ति करती थी, लेकिन अब गांव में सौर पैनल लगने के बाद नागरिक अपनी बिजली का उत्पादन खुद करेंगे।
- सूर्य ग्राम बनने से किसानों और पशुपालकों की आय में इजाफा होगा। इसके साा ही आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं बढ़ेंगी, जिससे ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
सूर्य ग्राम के लिए आखिर मोढेरा को ही क्यों चुना?
मोढेरा को 'सूर्य ग्राम' के लिए चुनने के पीछे इसका इतिहास है। दरअसल, मोढेरा गांव गुजरात के महेसाणा जिले में पुष्पावती नदी के किनारे स्थित है। यह गांव पाटन से 30 किलोमीटर दक्षिण में है। मोढेरा अपने प्राचीन सूर्य मंदिर के लिए जाना जाता है। यहां का सूर्य मंदिर विलक्षण स्थापत्य एवं शिल्प कला के लिए मशहूर है। इस मंदिर का निर्माण सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम ने 1026 ईस्वी में करवाया था।
मंदिर के 52 स्तंभ हैं 52 सप्ताहों के प्रतीक :
मंदिर का सभामंडप 52 स्तंभों पर निर्मित किया गया है और ये 52 स्तंभ वर्ष के 52 सप्ताह को बताते हैं। मंडप की बाहरी दीवारों पर चारों ओर 12 आदित्यों, दिक्पालों, देवियों तथा अप्सराओं की मूर्तियां हैं। सभा मंडप के सामने एक बड़ा तोरण द्वार है। इसके ठीक सामने एक आयताकार कुंड है, जिसे 'सूर्य कुंड' कहते हैं। फिलहाल यह मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।
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