
Rahul Gandhi disqualification: राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है। कोर्ट से अगर राहत नहीं मिलता तो राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्र वायनाड में उपचुनाव संभावित है। राहुल गांधी को सूरत की एक अदालत में मोदी सरनेम पर कमेंट करने पर मानहानि के एक केस में सजा सुनाई गई है। सजा सुनाए जाने के बाद शुक्रवार को उनको लोकसभा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। दरअसल, देश में जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत राहुल गांधी पर यह कार्रवाई हुई है। प्रावधान के अनुसार दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर किसी भी जनप्रतिनिधि की सजा स्वत: ही समाप्त हो जाती है। लोकसभा सचिवालय से राहुल गांधी को अयोग्य ठहराए जाने का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद इस कानून को लेकर बहस शुरू हो गई है। आईए जानते हैं पूरा डिटेल...
किस कानून के तहत राहुल गांधी हुए अयोग्य?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के अनुसार, एक सांसद/विधायक को किसी भी अपराध का दोषी ठहराया जाता है और कम से कम दो साल के लिए कारावास घोषित किया जाता है, अदालत द्वारा सजा की तारीख से अयोग्य घोषित किया जाएगा। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 (3) के अनुसार, किसी भी अपराध के लिए दोषी पाए गए सांसद/विधायक को सजा की तारीख से अयोग्य घोषित किया जाएगा, शिकायत में कहा गया है। दरअसल, साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने लिली थॉमस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के केस में सुनवाई करते हुए किसी भी आपराधिक मामले में कम से कम दो साल या उससे अधिक की सजा होने के बाद संबंधित सांसद या विधायक की सदस्यता तत्काल प्रभाव से गंवाए जाने का प्रावधान किया था।
जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय की बेंच ने इसके बाद रिप्रेंजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट की धारा 8(4) जोकि किसी भी जनप्रतिनिधि को अपील के लिए तीन महीने की मोहलत देती है को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। हालांकि, इस फैसले को बदलने के लिए संसद में तत्कालीन लॉ मिनिस्टर कपिल सिब्बल ने बिल पेश किया कि जनप्रतिनिधि की सदस्यता तत्काल नहीं जाएगी लेकिन इस बिल को सरेआम राहुल गांधी ने मीडिया के सामने फाड़ दिया था। इसके बाद कांग्रेस सरकार बिल नहीं ला सकी।
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