
कौन थे मुखर्जी
श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक और इसके पहले अध्यक्ष डॉक्टर थे। 23 जून 1953 को उनकी रहस्यमय तरीके से मौत हो गई थी। तब से ही बीजेपी इस दिन को "बलिदान दिवस" के रूप में मनाती है।
डॉक्टर मुखर्जी 370 कानून के मुखर विरोधी रहे. वो हमेशा चाहते थे कि कश्मीर पूरी तरह से भारत का हिस्सा बने और वहां अन्य राज्यों की तरह एक कानून लागू हो। मुखर्जी नेहरू मन्त्रीमंडल का हिस्सा रहे। उनका कहना था कि एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे।
उनका जन्म 6 जुलाई को 1901 में कलकत्ता में हुआ था। पिता उस समय के जाने माने शिक्षाविद थे। उन्होंने अपना ग्रेजुएशन कलकत्ता यूनिवर्सिटी से किया। 1927 में बैरिस्टर बने। 33 साल की उम्र में कलकत्ता यूनिवर्सिटी के कुलपति बनाये गये। वे काँग्रेस पार्टी से जुड़कर विधानसभा पहुँचे और मतभेद के चलते कांग्रेस से इस्तीफ़ा दे दिया। उन्हें प्रखर राष्ट्रवाद का प्रेणता माना जाता है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपनी अंतरिम सरकार में मंत्री बनाया था। बहुत कम समय के लिये वे इस मंत्रीमंडल में मंत्री रहे। उन्होने नेहरू पर पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
जब नेहरू ने माँगी माफ़ी
बताया जाता है , श्यामा प्रसाद मुखर्जी नेहरू की पहली सरकार में मंत्री थे। जब नेहरू-लियाक़त पैक्ट हुआ तो उन्होंने और बंगाल के एक और मंत्री ने इस्तीफा दे दिया। उसके बाद उन्होंने जनसंघ बनाया। दिल्ली में चल रहे निकाय चुनाव के दौरान संसद में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आरोप लगाया कि काँग्रेस चुनाव जीतने के लिए वाइन और मनी का इस्तेमाल कर रही है। जिसका नेहरू ने काफ़ी विरोध किया. नेहरू को लगा था मुखर्जी ने वाइन और वुमन कहा है। जिसके बाद मुखर्जी ने नेहरू के विरोध का जबाव देते हुए कहा उन्होंने वुमन नहीं कहा है। आप रिकोर्ड उठा कर देख सकते हैं. जिसके बाद भरे सदन में नेहरू ने मुखर्जी से हाथ जोड़कर माफ़ी माँगी थी। जिसके बादि मुखर्जी ने इतना कहा आपको माफ़ी मांगने की कोई ज़रूरत नहीं। मेरा इतना कहना की सदन में मैं कोई भी गलत बयानी नहीं करूँगा ।!
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