
Who is Bilkis Bano: गुजरात के गोधरा में 2002 में हुए दंगों के दौरान बिलकिस बानो गैंगरेप केस के दोषी सभी 11 कैदियों को रिहा कर दिया गया है। दरअसल, गुजरात सरकार ने अपनी माफी नीति के तहत बिलकिस बानो गैंगरेप केस में दोषी सभी कैदियों को रिहा करने की अनुमति दी थी। इस नीति के तहत 15 साल की सजा काट चुके सभी दोषियों को रिहा कर दिया है। इन सभी पर बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप करने और उसके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या करने का आरोप था। बता दें कि इन सभी आरोपियों को कोर्ट ने 2008 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
रिहाई पर भड़के ओवैसी :
वहीं, इनकी रिहाई से AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी भड़क गए हैं। ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर दिए भाषण को याद दिलाते हुए उन्हें घेरने की कोशिश की है। ओवैसी ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब भी मुस्लिम महिलाओं की बात आती है तो भाजपा सब भूल जाती है और सिर्फ जुबानी तौर पर ही महिलाओं की इज्जत की बात करती है।
क्या बोले बिलकिस बानो के पति?
बिलकिस बानो के पति याकूब का कहना है कि हम सब इस फैसले से बेहद दुखी हैं। दोषियों के जेल से रिहा होने के बाद हमारा डर और बढ़ गया है। हमें अब तक किसी भी तरह की सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई है। डर के चलते हमें जगह बदल-बदल कर रहना पड़ रहा है। इस हादसे में हमने अपना सब कुछ गंवा दिया था। मेरी 3 साल की बेटी की मौत हो गई थी।
जानें कौन है बिलकिस बानो?
बिलकिस बानो गुजरात की रहने वाली हैं। 2002 के दंगों के बाद वो अपना राज्य छोड़कर कहीं और जाना चाहती थीं। उनके साथ उनकी 3 साल की बच्ची और परिवार के 15 अन्य सदस्य भी थे। तब गुजरात में हिंसा भड़की हुई थी। 3 मार्च, 2002 को दंगे के बाद 5 महीने की प्रेग्नेंट बिलकिस बानो अपनी फैमिली के साथ एक सुरक्षित जगह की तलाश में छिपी थीं। इसी दौरान हथियारों से लैस भीड़ ने उनके परिवार पर हमला कर दिया। आरोप है कि इस हमले के बाद बिलकिस के साथ गैंगरेप किया गया और उनके परिवार के 7 लोग मारे गए। दंगे में उनकी 3 साल की बेटी को भी मार दिया गया।
क्यों भड़के थे गुजरात में दंगे?
बता दें कि इससे पहले 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे को जला दिया गया था। इसमें अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क गए थे।
बिलकिस गैंगरेप केस में ये आरोपी हुए रिहा :
बिलकिस बानो गैंगरेप केस में राधेश्याम शाही, केशुभाई वदानिया, बकाभाई वदानिया, राजीवभाई सोनी, जसवंत चतुरभाई नाई, रमेशभाई चौहान, शैलेशभाई भट्ट, बिपिन चंद्र जोशी, मितेश भट्ट, गोविंदभाई नाई और प्रदीप मोढिया के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। सभी आरोपियों को 2004 में गिरफ्तार किया गया था। बाद में 21 जनवरी, 2008 को मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 11 आरोपियों को दोषी पाया था और इन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था।
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