
Who is Shubhra Ghoroi: पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी पार्थ चटर्जी पर मंगलवार को एक महिला ने जूता फेंक कर मारा। हालांकि, पार्थ को यह जूता नहीं लगा और वो बच गए। इस बारे में जब महिला से पूछा गया तो उसका कहना है कि मुझे उस पर जूता फेंकने का कोई पछतावा नहीं है। बल्कि इस बात का मलाल है कि जूता उसे लगा नहीं। बता दें कि मंगलवार को जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अफसर पार्थ को रेगुलर जांच के बाद अस्पताल से लेकर बाहर आ रहे थे, तभी इस महिला ने उन पर जूता फेंक कर मारा था।
कौन है पार्थ पर जूता फेंकने वाली महिला?
बता दें कि पार्थ चटर्जी पर जूता फेंकने वाली महिला कोलकाता की ही रहने वाली शुभ्रा घोरुई है। शुभ्रा यहां के अमताला इलाके में रहती है। शुभ्रा का कहना है कि वो ईडी के छापे में चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के दो फ्लैटों से मिले 50 करोड़ रुपए और गहने को लेकर भड़की हुई है। इन लोगों ने गरीबों का पैसा खाया है। मुझे बहुत खुशी होती अगर जूता उसके सिर पर लगता।
इन्हें कार नहीं, घसीटते हुए ले जाना चाहिए :
शुभ्रा घोरुई ने आगे कहा- एक तरफ लोगों के पास नौकरी-धंधा नहीं है, वो सड़कों पर बेरोजगार घूम रहे हैं। दूसरी तरफ, इन जैसे लोग जनता को लूटकर एसी कारों में घूम रहे हैं। इसे कार में नहीं बल्कि रस्सी से बांधकर घसीटने हुए ले जाना चाहिए था। ये गुस्सा सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि पूरे बंगाल की जनता का है।
सवालों से कन्नी काट रहे पार्थ चटर्जी :
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी इस घोटाले को लेकर लगातार पार्थ से सवाल कर रही है। हालांकि, वो जानबूझकर सवालों का जवाब देने से कन्नी काट रहे हैं।
ईडी के एक अफसर के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उन्होंने ज्यादातर मुंह ही नहीं खोला। इससे पहले उन्होंने खुद को साजिश का शिकार बताया था। हालांकि, जब पूछा गया कि बरामद पैसा किसका है तो वो कोई जवाब नहीं दे पाए थे।
आंख मूंदकर की गईं शिक्षकों की भर्तियां :
बता दें कि शिक्षक भर्ती घोटाले में ईडी ने पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को 23 जुलाई को गिरफ्तार किया था। जब चटर्जी को गिरफ्तार किया गया, उस वक्त वो बंगाल के उद्योग मंत्री थी। हालांकि, घोटाले में नाम आने के बाद बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने चटर्जी को मंत्री पद से हटा दिया है। 2016 में हुए घोटाले के समय पार्थ शिक्षा मंत्री थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घोटाले में नॉन क्वालिफाइड लोगों को शिक्षा विभाग में आंख मूंदकर नौकरियां दी गईं। जबकि योग्य लोग बेरोजगार रह गए।
क्या है शिक्षक भर्ती घोटाला :
पश्चिम बंगाल में 2014 और 2016 में शिक्षकों की भर्ती की गई थी। इस दौरान योग्य लोगों की जगह ऐसे लोगों को नौकरी दे दी गई जो या तो रसूख वाले थे, या फिर जिन्होंने पैसा खिलाया। इसके बाद मैरिट लिस्ट में आने वाली बबीता सरकार ने धांधली का आरोप लगाते हुए एक याचिका दाखिल की थी। बाद में हाईकोर्ट ने इस मामले में CBI जांच के आदेश दिए थे। वहीं, इस घोटाले में पैसों के हेरफेर को लेकर बाद में ED ने भी जांच शुरू की।
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