
नई दिल्ली. देश के नामी वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी का 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमर चल रहे थे। अपने जीवन में कई बड़े केस जीतने वाले जेठमलानी देश के सबसे बेहतरीन वकीलों में शुमार थे। जेठमलानी केंद्रीय कानून मंत्री भी रह चुके हैं।
राम जेठमलानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मेरा पिता और दादा वकील थे। लेकिन वे मुझे वकील नहीं बनाना चाहते थे। पिता जाहते थे कि मैं इंजीनियर बनूं। उन्होंने मेरा दाखिला साइंस में करवा दिया। लेकिन मुझसे वकालत नहीं छूटी। उस वक्त सरकार ने एक नियम बनाया। नियम के तहत कोई भी एक परीक्षा पास करके वकालत में दाखिला ले सकता था। मैंने परीक्षा दी और पास हो गया। महज 17 साल की उम्र में जेठमलानी अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी कर चुके थे।
- बार काउंसिल के नियम के अनुसार 21 साल की उम्र से पहले किसी व्यक्ति को वकालत का लाइसेंस नहीं दिया जा सकता है।
- उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि लाइसेंस के लिए मैंने मुख्य न्यायधीश से बात की थी। मैंने उनसे कहा था कि जब मैंने वकालत में दाखिला लिया था उस वक्त कोई नियम नहीं था। इसलिए मेरे ऊपर यह नियम लागू नहीं होता है।
- जेठमलानी की बात से मुख्य न्यायधीश इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने बार काउंसिल को पत्र लिखकर राम जेठमलानी को लाइसेंस देने पर विचार करने के लिए कहा।
इसके बाद नियमों में बदलाव किया गया। फिर एक अपवाद के रूप में 18 साल की उम्र में जेठमलानी को वकालत का लाइसेंस दे दिया गया। इस तरह इस उम्र में यह देश के पहले और आखिरी व्यक्ति बन हैं, जिन्होंने इतनी कम उम्र में वाकलत का लाइसेंस प्राप्त किया।
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