19 Min 34 Sec Video: वीडियो पर क्लिक करवाने ठग अपना रहे एक खास हथकंडा, कहीं आप तो नहीं फंसे

Published : Jul 10, 2026, 08:12 PM IST
19 minute 34 second viral mms update

सार

19 Minute Viral Clip MMS, 7 Minute Viral Video और 9 Minute MMS जैसे फर्जी लिंक के जरिए साइबर ठग लोगों को निशाना बना रहे हैं। जानिए पूरा फ्रॉड और बचाव।

19 Minute 34 Second Viral Clip: पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर एक नया और अजीब ट्रेंड देखने को मिल रहा है। पहले 19 Minute 34 Second Viral Video, फिर 7 Minute Viral Video और अब 9 Minute MMS जैसे कीवर्ड तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन पोस्ट के साथ एक लिंक भी शेयर किया जाता है, जिसे देखकर कई लोग उत्सुकता में उस पर क्लिक कर देते हैं। यहीं से साइबर ठगों का जाल शुरू हो जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये लिंक किसी असली वीडियो तक नहीं ले जाते, बल्कि लोगों को फंसाने के लिए बनाए गए फर्जी लिंक होते हैं।

19 Minute Viral Clip MMS के नाम पर कैसे हो रही है ठगी?

साइबर अपराधी लोगों को लुभाने के लिए ऐसे कीवर्ड का इस्तेमाल करते हैं, जिनके बारे में सोशल मीडिया पर पहले से चर्चा चल रही होती है। पोस्ट में दावा किया जाता है कि किसी सेलिब्रिटी, नेता या आम व्यक्ति का पर्सनल वीडियो लीक हो गया है और उसे देखने के लिए एक लिंक दिया जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति इस लिंक पर क्लिक करता है, उसे एक फर्जी वेबसाइट पर भेज दिया जाता है। वहां वीडियो का एक थंबनेल दिखाई देता है, जिससे यूजर को लगता है कि वीडियो मौजूद है।

फर्जी वेबसाइट पर क्लिक करते ही शुरू हो जाता है साइबर ठगों का खेल

  • जब यूजर उस थंबनेल या आगे दिए गए बटन पर क्लिक करता है, तो कई मामलों में वह फिशिंग वेबसाइट या दुर्भावनापूर्ण (मैलिशियस) पेज पर पहुंच जाता है।
  • ऐसे पेज का मकसद लोगों की पर्सनल डिटेल हासिल करना या उन्हें धोखाधड़ी का शिकार बनाना होता है।
  • इसके बाद साइबर अपराधी यूजर की संवेदनशील जानकारी चुराने की कोशिश करते हैं।
  • कई मामलों में बैंकिंग डिटेल, लॉगिन जानकारी या अन्य निजी डेटा हासिल कर वित्तीय नुकसान पहुंचाया जाता है। कुछ मामलों में निजी जानकारी के आधार पर ब्लैकमेल करने की कोशिश भी की जाती है।

7 Minute Viral Video और 9 Minute MMS जैसे कीवर्ड क्यों चुने जाते हैं?

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि ठग जानबूझकर 19 मिनट, 7 मिनट या 9 मिनट जैसी सटीक समय अवधि का इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के लिए, 19:34 मिनट या 7:11 मिनट जैसा समय देखकर लोगों को लगता है कि वीडियो वास्तव में मौजूद है। इस तरह की सटीक जानकारी लोगों के मन में भरोसा पैदा करती है और वे बिना ज्यादा सोचे-समझे लिंक पर क्लिक कर देते हैं। यही मनोवैज्ञानिक तरीका साइबर अपराधियों के लिए लोगों को फंसाने का एक प्रभावी हथियार बन जाता है।

ऐसे फर्जी वायरल लिंक से कैसे बचें?

  • सोशल मीडिया पर मिले किसी भी अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
  • किसी वायरल वीडियो या MMS के नाम पर शेयर किए गए लिंक की सत्यता पहले जांच लें।
  • केवल भरोसेमंद वेबसाइट और आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।
  • अपने फोन और कंप्यूटर में सुरक्षा अपडेट तथा एंटीवायरस का उपयोग करें।
  • किसी भी वेबसाइट पर बैंकिंग जानकारी, OTP या पासवर्ड दर्ज करने से पहले उसकी प्रामाणिकता जरूर जांचें।
  • यदि किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक हो गया है, तो तुरंत अपने महत्वपूर्ण पासवर्ड बदलें और जरूरत पड़ने पर बैंक तथा संबंधित सेवा प्रदाता से संपर्क करें।

19 मिनट 34 सेकंड वायरल वीडियो क्या है?

2025 के अंत में सोशल मीडिया पर कथित तौर पर एक कपल का प्राइवेट वीडियो वायरल होने की बात सामने आई। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इससे जुड़े पोस्ट, लिंक वायरल होने लगे। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोग इसके बारे में सर्च करने लगे और ये कीवर्ड भी ट्रेंड में आ गया। हालांकि, अब तक इस कथित वीडियो की प्रामाणिकता का कोई सबूत नहीं है। ना ही किसी आधिकारिक एजेंसी या विश्वसनीय स्रोत से इसकी पुष्टि हुई है।

Disclaimer: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया और इंटरनेट पर चल रही जानकारियों के आधार पर डिजिटल सेफ्टी जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी बिना वेरिफाइड वीडियो का समर्थन, प्रचार या एक्सेस देने का उद्देश्य नहीं है। वायरल क्लिप की वास्तविकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह AI Deepfake तकनीक का परिणाम भी हो सकता है। Asianet News बताए गए दावों और उनकी प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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