
19 Minute 34 Second Viral Video Latest News: पिछले कई हफ्तों से सोशल मीडिया पर ‘19 मिनट 34 सेकंड का वायरल वीडियो’ और ‘19 मिनट का वायरल वीडियो’ जैसे कीवर्ड लगातार ट्रेंड कर रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स का एक बड़ा तबका पिछले 4 महीने से इस कथित वायरल MMS क्लिप को सर्च करने में लगा हुआ है। इंस्टाग्राम, X, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग इस वीडियो से जुड़े लिंक सर्च कर रहे हैं। कई वेबसाइट और सोशल मीडिया पोस्ट दावा कर रहे हैं कि उनके पास यह वीडियो मौजूद है या डाउनलोड के लिए उपलब्ध है। हालांकि, अब साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने इस पूरे मामले को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ‘19 मिनट 34 सेकंड वायरल वीडियो’ जैसे ट्रेंडिंग कीवर्ड्स का इस्तेमाल हैकर्स और ऑनलाइन स्कैमर्स लोगों को जाल में फंसाने के लिए कर रहे हैं। जैसे ही कोई यूजर ऐसे संदिग्ध लिंक पर क्लिक करता है, उसे फर्जी वेबसाइट पर भेज दिया जाता है। कई मामलों में ये वेबसाइट्स चुपचाप यूजर के मोबाइल या कंप्यूटर में मैलवेयर इंस्टॉल कर देती हैं। इसके बाद हैकर्स यूजर की निजी जानकारी जैसे- बैंक अकाउंट डिटेल्स, पासवर्ड, OTP, सोशल मीडिया लॉगिन, पर्सनल डेटा चुराने की कोशिश कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग अभी भी वायरल क्लिप खोज रहे हैं, वे साइबर अपराधियों के आसान निशाने बन सकते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो और क्लिप्स असली नहीं हैं। ट्रेंडिंग कीवर्ड्स का फायदा उठाकर एआई-जनरेटेड वीडियो और डीपफेक कंटेंट तेजी से फैलाया जा रहा है। ऐसे वीडियो देखने या डाउनलोड करने के बहाने यूजर्स को खतरनाक वेबसाइट्स तक पहुंचाया जा रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इंटरनेट पर ‘19 मिनट 34 सेकंड’ नाम के किसी वास्तविक वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकतर कंटेंट फर्जी, एडिटेड या AI की मदद से तैयार किया गया बताया जा रहा है।
साइबर एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि किसी भी आपत्तिजनक या संदिग्ध वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करना कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। इंस्टाग्राम, फेसबुक, टेलीग्राम या अन्य प्लेटफॉर्म पर ऐसे क्लिप्स शेयर करना भारतीय कानून के तहत अपराध माना जा सकता है।
आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत आपत्तिजनक सामग्री साझा करने पर 3 साल तक की जेल, 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, धारा 67A के तहत यौन सामग्री साझा करने के मामले में पहली बार अपराध करने पर 5 साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बार-बार ऐसा अपराध करने पर सजा बढ़कर 7 साल तक हो सकती है। इसके अलावा, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 292, 293 और 354C के तहत भी कार्रवाई संभव है।
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